यूँँ ज़िन्दगी के वास्ते भी कुछ नहीं किया ये सोचता है दिल तो उम्र के पड़ाव पर
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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हाल न पूछो मोहन का सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ज़मीं पे आसमाँ पिघला हुआ ही पाओगे समय यूँँ हाथों से निकला हुआ ही पाओगे किसी के वास्ते ख़ुद को सँवार कर देखो तुम अपने आप को बदला हुआ ही पाओगे
Naviii dar b dar
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ज़माने में है ये जो तनक़ीद अपनी भला कोई किस रास्ते को चुने यूँँ
Naviii dar b dar
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ज़माने भर से तो की दिल-लगी हम ने मोहब्बत का सलीक़ा भी नहीं आया
Naviii dar b dar
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ज़माने भर ने तो बस दिए हैं ता'ने हम को किसी ने भी मन में झाॅंक कर नहीं देखा यूँँ
Naviii dar b dar
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यूँँ तो हर उलझनों से उलझा पड़ा हूँ मैं पर फिर भी ज़िन्दगी में डटकर खड़ा हूँ मैं ग़म कोई भी न छू पाए मेरे घर को यूँँ ये ज़िम्मेदारी से जो घर का बड़ा हूँ मैं
Naviii dar b dar
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