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ज़माने भर ने तो बस दिए हैं ता'ने हम को किसी ने भी मन में झाॅंक कर नहीं देखा यूँँ

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उन इश्क़ के भी हारों को हारा नहीं मिला हम जैसे आशिक़ों को किनारा नहीं मिला यूँँ प्यार में जो उम्र भर उम्मीद थी यही फिर भी किसी से इश्क़ दोबारा नहीं मिला

Naviii dar b dar

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मुहब्बत ने सब को किनारा दिया है किसी शख़्स का यूँँ सहारा दिया है जिसे मानता है ये सारा ज़माना मुक़द्दस ये रिश्ता भी प्यारा दिया है

Naviii dar b dar

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वो अलग किरदार में दिखता है अब आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब देख कर दुख होता है दिल को मेरे झूठ हर अख़बार में दिखता है अब

Naviii dar b dar

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वो अलग किरदार में दिखता है अब तो आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब तो देख कर दुख होता है दिल को मेरे भी झूठ हर अख़बार में दिखता है अब तो

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रास्ता ही नहीं दिल में भी जाने को कितने ही ढब किए यूँँ तुझे पाने को

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