मुहब्बत ने सब को किनारा दिया है किसी शख़्स का यूँँ सहारा दिया है जिसे मानता है ये सारा ज़माना मुक़द्दस ये रिश्ता भी प्यारा दिया है
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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ज़मीं पे आसमाँ पिघला हुआ ही पाओगे समय यूँँ हाथों से निकला हुआ ही पाओगे किसी के वास्ते ख़ुद को सँवार कर देखो तुम अपने आप को बदला हुआ ही पाओगे
Naviii dar b dar
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ज़माने में है ये जो तनक़ीद अपनी भला कोई किस रास्ते को चुने यूँँ
Naviii dar b dar
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ज़िन्दगी को यूँँ फिर आज़माने के बा'द कुछ भी तो अब नहीं है ज़माने के बा'द कैसे ख़ुद को भी दे अब तसल्ली यहाँ पे कैसे ग़म में है वो गुनगुनाने के बा'द
Naviii dar b dar
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यूँँ तो हर उम्र के भी दौर देखे हैं बुज़ुर्गों की दुआ ख़ाली नहीं जाती
Naviii dar b dar
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ये ख़्वाबों की दुनिया बसाए हैं हम भी मुहब्बत ज़रा आज़माए हैं हम भी सजाए तो कैसे सजाए कोई ख़्वाब यहाँ मुफ़लिसी के सताए हैं हम भी
Naviii dar b dar
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