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यूँँ तो हर उम्र के भी दौर देखे हैं बुज़ुर्गों की दुआ ख़ाली नहीं जाती

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ज़िन्दगी को यूँँ फिर आज़माने के बा'द कुछ भी तो अब नहीं है ज़माने के बा'द कैसे ख़ुद को भी दे अब तसल्ली यहाँ पे कैसे ग़म में है वो गुनगुनाने के बा'द

Naviii dar b dar

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उन इश्क़ के भी हारों को हारा नहीं मिला हम जैसे आशिक़ों को किनारा नहीं मिला यूँँ प्यार में जो उम्र भर उम्मीद थी यही फिर भी किसी से इश्क़ दोबारा नहीं मिला

Naviii dar b dar

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वो अलग किरदार में दिखता है अब आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब देख कर दुख होता है दिल को मेरे झूठ हर अख़बार में दिखता है अब

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वो अलग किरदार में दिखता है अब तो आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब तो देख कर दुख होता है दिल को मेरे भी झूठ हर अख़बार में दिखता है अब तो

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प्रेम में भटका हुआ हूँ आजकल हर तरफ़ लटका हुआ हूँ आजकल कोई जब से आया है जीवन में यूँँ तब से ही अटका हुआ हूँ आजकल

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