ज़माने भर से तो की दिल-लगी हम ने मोहब्बत का सलीक़ा भी नहीं आया
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ज़िन्दगी को यूँँ फिर आज़माने के बा'द कुछ भी तो अब नहीं है ज़माने के बा'द कैसे ख़ुद को भी दे अब तसल्ली यहाँ पे कैसे ग़म में है वो गुनगुनाने के बा'द
Naviii dar b dar
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ज़मीं पे आसमाँ पिघला हुआ ही पाओगे समय यूँँ हाथों से निकला हुआ ही पाओगे किसी के वास्ते ख़ुद को सँवार कर देखो तुम अपने आप को बदला हुआ ही पाओगे
Naviii dar b dar
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थे यूँँ डूबे हुए इस इश्क़ में इक शख़्स की ख़ातिर जो मेरा हो नहीं सकता ये था मालूम तो मुझ को
Naviii dar b dar
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मेरी हर रात ख़ामोशी में गुज़री है दिल की भी बात ख़ामोशी में गुज़री है आज फिर से वही दिन यूँँ तन्हाई में और ये रात ख़ामोशी में गुज़री है
Naviii dar b dar
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वो मेरा ही बना अपना भी जिस तरह यारों हवाओं को भी तो इस की ख़बर नहीं थी यूँँ
Naviii dar b dar
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