zabt-e-nala se aaj kaam liya girti bijli ko main ne tham liya
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही
Jaleel Manikpuri
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लुटाते हैं वो दौलत हुस्न की बावर नहीं आता हमें तो एक बोसा भी बड़ी मुश्किल से मिलता है
Jaleel Manikpuri
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शब को मय ख़ूब सी पी सुब्ह को तौबा कर ली रिंद के रिंद रहे हाथ से जन्नत न गई
Jaleel Manikpuri
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आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर
Jaleel Manikpuri
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आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की
Jaleel Manikpuri
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