ज़मीन पर मनुष्य को ही ख़तरा है मनुष्य से यहाँ-वहाँ मनुष्य डरता फिरता है मनुष्य से ख़ुदा ने भूक और मनुष्य ने बनाया इश्क़ को ख़ुदा का काम ज़्यादा जानलेवा है मनुष्य से
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तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं
Dushyant Kumar
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सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़' क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया
Firaq Gorakhpuri
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अपने बच्चों से बहुत डरता हूँ मैं बिल्कुल अपने बाप के जैसा हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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ज़मीन-ओ-आसमाँ को जगमगा दो रौशनी से दिसम्बर आज मिलने जा रहा है जनवरी से
Bhaskar Shukla
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सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो ख़तरा तो मुफ़्त में भी नहीं लेना चाहिए घर से निकल के मोल न लो फ़ासला रखो
Jawwad Sheikh
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मज़हब पर आ जाए बात तो बस्ती जलती है रेप अगर हो तो सिर्फ़ मोमबत्ती जलती है
Jagveer Singh
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यारों नेताओं की बेटी है ये मुहब्बत सारी क़स में झूठी सारे वादे झूठे यार बिना आधी दुनिया लक़वा लगती है जग रूठे तो रूठे जिगरी यार न रूठे
Jagveer Singh
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उठा कर पहलू से पाँव में बैठा दो कहेंगे तो वही जो कहना है हम को
Jagveer Singh
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मुहब्बत को बचाने की यही है आख़िरी इक राह पुरोहित से रहो तुम दूर और मुल्ला से तो बच कर
Jagveer Singh
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दास्ताँ बस यही है मेरी रह गई दास्ताँ में कमी ज़िन्दगी भर का वा'दा था ना ज़िन्दगी भर गई क्या तेरी
Jagveer Singh
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