ज़रूरी तो नहीं उस की हँसी में प्यार ही हो हँसी के इस जहाँ में और भी मतलब बहुत हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ज़रूरत ढूँढ़ लाती है पता मेरा मुझे अब इस पते से दूर जाना है
Vishakt ki Kalam se
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शाप ये मैं जी रहा हूँ ज़हर को मैं पी रहा हूँ कौन ख़ुश हैं ज़िंदगी से रोज़ आँखें सी रहा हूँ
Vishakt ki Kalam se
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नतीजे की कभी परवाह तो कर मुहब्बत में मिलन की चाह तो कर घुमा लेना उसे दिल के महल में मगर दिल के महल में राह तो कर
Vishakt ki Kalam se
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नहीं शाइ'र बने कोई न टूटे दिल किसी का न भीतर से जले कोई न बदले ख़िल किसी का
Vishakt ki Kalam se
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नहीं नाम मेरा शरीफ़ों में लेकिन समझ तू नहीं ये शरारत हमारी अगर हम दिखा दें शराफ़त हमारी ख़ुदा भी करेगा वकालत हमारी
Vishakt ki Kalam se
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