ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशनी नहीं
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझ सा न बना दे
Behzad Lakhnavi
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मैं ढूँढ़ रहा हूँ मिरी वो शम्अ' कहाँ है जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे
Behzad Lakhnavi
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ऐ दिल की ख़लिश चल यूँँही सही चलता तो हूँ उन की महफ़िल में उस वक़्त मुझे चौंका देना जब रंग पे महफ़िल आ जाए
Behzad Lakhnavi
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ऐ जज़्बा-ए-दिल गर मैं चाहूँ हर चीज़ मुक़ाबिल आ जाए मंज़िल के लिए दो गाम चलूँ और सामने मंज़िल आ जाए
Behzad Lakhnavi
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इश्क़ का ए'जाज़ सज्दों में निहाँ रखता हूँ मैं नक़्श-ए-पा होती है पेशानी जहाँ रखता हूँ मैं
Behzad Lakhnavi
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