ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
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किताबें बंद कर के जब मैं बिस्तर पर पहुँचता हूँ तुम्हारी याद भी आ कर बगल में लेट जाती है
Bhaskar Shukla
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ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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कौन इस घर की देख-भाल करे रोज़ इक चीज़ टूट जाती है
Jaun Elia
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ये ज़िन्दगी की दौड़ दौड़कर मिला ही क्या हमें न जीता शख़्स घर जा पाता है न हारा शख़्स ही
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ज़रा तुम अपनी हद में रहने की कोशिश करो वरना तुम्हारे ऐब से इक दिन तुम्हें बदनाम कर देंगे
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ज़रा रख ले तू नाम उस का लबों पर ख़ुदा की इबादत में राहत मिलेगी
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तुझे पता नहीं मैं तेरा बाप लगता हूँ सलाम कर मुझे तू बात करने से पहले
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तू कहीं मत जा छोड़ कर मुझ को क्या करूँँगा तेरे बग़ैर यहाँ
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