ज़िन्दगी की उलझनें बूढ़ा न कर दे रात भर ये सोच कर सोते नहीं हम
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ये सोचते रहना मुझे पागल ही न कर दे ये सोचते रहना कि मैं पागल तो नहीं हूँ
Aamir Azher
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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इश्क़ से अपने कुछ चुने लम्हें अनकहे और अनसुने लम्हें आओ मिल कर जियें दुबारा से सर्द रातों के गुनगुने लम्हें
Sandeep Thakur
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ज़िन्दगी तुझ को न जी पाए हम वक़्त ने दर्द दिया जब इतना
Meem Alif Shaz
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ज़िंदगी तुझ को दिल से न चाहा मगर बन्दगी के लिए चाहना ही पड़ा
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी से हम ख़फ़ा हो के कहाँ जाएँगे शाज़ हम जहाँ जाएँगे ये दुश्वारियाँ होगी वहाँ
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी रुक ही न जाए इस लिए भी लोग पैसे ख़र्च करते ही नहीं हैं
Meem Alif Shaz
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ज़हर पीने से क्या मिला तुम को उस को देखो अभी भी ज़िंदा है
Meem Alif Shaz
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