ज़िन्दगी से हम ख़फ़ा हो के कहाँ जाएँगे शाज़ हम जहाँ जाएँगे ये दुश्वारियाँ होगी वहाँ
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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पहले लगा था हिज्र में जाएँगे जान से पर जी रहे हैं और भी हम इत्मीनान से
Ankit Maurya
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जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को वही तक मुझ को पूछा जा रहा है ज़माने पर भरोसा करने वालों भरोसे का ज़माना जा रहा है
Naeem Akhtar Khadimi
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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है
Waseem Barelvi
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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
Sandeep Thakur
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ज़िन्दगी रुक ही न जाए इस लिए भी लोग पैसे ख़र्च करते ही नहीं हैं
Meem Alif Shaz
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ये किस गुमाँ में जी रहा हूँ आजकल ये जिस्म मेरा है न ये साँसें मिरी
Meem Alif Shaz
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ज़िंदा हो के रहना है मुझ को हमेशा तू मिरे दिल मैं हज़ारों ज़ख़्म देदे
Meem Alif Shaz
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ज़िंदा हो के रहना है मुझ को हमेशा तू मिरे दिल को हज़ारों ज़ख़्म दे दे
Meem Alif Shaz
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ये किस की ख़ुशबू महकी है गली में किराएदार भी आने लगे हैं
Meem Alif Shaz
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