बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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गुल सा तू तेरा साथ ख़ुशबू सा हाथ में तेरा हाथ ख़ुशबू सा हो के तुझ से जुदा भटकता हूँ गुल से बिछड़ी अनाथ ख़ुशबू सा
Sandeep Thakur
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मुझ से दो दिन अलग रही है तू देख तो कैसी लग रही है तू हो गया राख जल के मैं लेकिन धीरे-धीरे सुलग रही है तू
Sandeep Thakur
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आ के नज़दीक मुँह न फेर ग़ज़ल पास आ बैठ थोड़ी देर ग़ज़ल सब तेरे नूर से चमकते हैं लफ़्ज़ मिसरे ख़याल शे'र ग़ज़ल
Sandeep Thakur
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इस नदी की जवानी गिरवी है क्या बहेगी रवानी गिरवी है डूबी है बूँद-बूँद कर्ज़े में बाँध में सारा पानी गिरवी है
Sandeep Thakur
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पाँव में खनकी चाँदी हो जैसे उस ने मुंडेर फाँदी हो जैसे छत पे दो पल मिलन जुदाई में धूप में बूँदा-बाँदी हो जैसे
Sandeep Thakur
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