मुझ से दो दिन अलग रही है तू देख तो कैसी लग रही है तू हो गया राख जल के मैं लेकिन धीरे-धीरे सुलग रही है तू
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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गुल सा तू तेरा साथ ख़ुशबू सा हाथ में तेरा हाथ ख़ुशबू सा हो के तुझ से जुदा भटकता हूँ गुल से बिछड़ी अनाथ ख़ुशबू सा
Sandeep Thakur
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चाँद चेहरा मुझे क़बूल नहीं अब समझने में कोई भूल नहीं आँख बस आँख ही है झील नहीं होंठ बस होंठ ही हैं फूल नहीं
Sandeep Thakur
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इस नदी की जवानी गिरवी है क्या बहेगी रवानी गिरवी है डूबी है बूँद-बूँद कर्ज़े में बाँध में सारा पानी गिरवी है
Sandeep Thakur
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सर्च करना है मुझे बे-कार इंटरनेट पर? धड़कनों में अपनी मेरा नाम कर गूगल कभी
Sandeep Thakur
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इश्क़ से अपने कुछ चुने लम्हें अनकहे और अनसुने लम्हें आओ मिल कर जियें दुबारा से सर्द रातों के गुनगुने लम्हें
Sandeep Thakur
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