ज़िंदगी मुझ को तिरी अब तो ज़रूरत ही नहीं उस की तस्वीर ही जीने के लिए काफ़ी है
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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यूँँ टुकड़ों में दहलीज़ बना लेने से घर की दीवारें रौनक़ खो बैठी है
salman khan "samar"
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ये पता चलता आज़माने पर कौन रोता है दूर जाने पर मैं अलग हूँ ज़रा ज़माने से मुस्कुराता हूँ मैं सताने पर
salman khan "samar"
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उर्दू से इश्क़ या इश्क़ से उर्दू है नाम कुछ भी हो ख़ुशबू तो दोनों में है
salman khan "samar"
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वो फिर मिलेंगे राह में बे-वक़्त बे-वजह हम को है इत्तिफ़ाक़ से उम्मीद आज भी
salman khan "samar"
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वो हाथ पकड़ कर के 'समर' खींचना उस का इक शख़्स के हाथों में तिरी याद है सीकर
salman khan "samar"
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