यूँँ टुकड़ों में दहलीज़ बना लेने से घर की दीवारें रौनक़ खो बैठी है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ये भूल है दुनिया की कई साल जिएँगे लगती है मुझे ज़िंदगी लम्हों की कहानी
salman khan "samar"
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शादी में गुलाबी सी जो कुर्ती वो पहन ले दुनिया की निगाहें तो अटक जाए उसी पे
salman khan "samar"
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सीकर में रह गया है मिरा एक और दिन आऊँगा लौट कर मैं तिरे पास आगरा
salman khan "samar"
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पूरी उम्मत में कोई उस के बराबर का नहीं मुस्कुराने का हुनर जिस का जहाँ से हो अलग
salman khan "samar"
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मिटता है ज़माना भी इशारे पे तिरे इक सारा ये ज़माना है तिरा दास यक़ीं कर
salman khan "samar"
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