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ankhon men chubh gaiin tiri yadon ki kirchiyan kandhon pe ghham ki shaal hai aur chand raat hai dil tod ke khamosh nazaron ka kya mila shabnam ka ye saval hai aur chand raat hai campus ki nahr par hai tira haath haath men mausam bhi la-zaval hai aur chand raat hai har ik kali ne odh liya matami libas har phuul pur-malal hai aur chand raat hai chhalka sa pad raha hai 'vasi' vahshaton ka rang har chiiz pe zaval hai aur chand raat hai aankhon mein chubh gain teri yaadon ki kirchiyan kandhon pe gham ki shaal hai aur chand raat hai dil tod ke khamosh nazaron ka kya mila shabnam ka ye sawal hai aur chand raat hai campus ki nahr par hai tera hath hath mein mausam bhi la-zawal hai aur chand raat hai har ek kali ne odh liya matami libas har phul pur-malal hai aur chand raat hai chhalka sa pad raha hai 'wasi' wahshaton ka rang har chiz pe zawal hai aur chand raat hai

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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं

Rehman Faris

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ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे

Rahat Indori

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सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?

Zubair Ali Tabish

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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा चारा-गर की नज़र बताती है हाल अच्छा नहीं है आज मिरा मैं तो रहता हूँ दश्त में मसरूफ़ क़ैस करता है काम-काज मिरा कोई कासा मदद को भेज अल्लाह मेरे बस में नहीं है ताज मिरा मैं मोहब्बत की बादशाहत हूँ मुझ पे चलता नहीं है राज मिरा

Fahmi Badayuni

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हज़ारों दुख पड़ें सहना मोहब्बत मर नहीं सकती है तुम से बस यही कहना मोहब्बत मर नहीं सकती तिरा हर बार मेरे ख़त को पढ़ना और रो देना मिरा हर बार लिख देना मोहब्बत मर नहीं सकती किया था हम ने कैम्पस की नदी पर इक हसीं वा'दा भले हम को पड़े मरना मोहब्बत मर नहीं सकती पुराने अहद को जब ज़िंदा करने का ख़याल आए मुझे बस इतना लिख देना मोहब्बत मर नहीं सकती वो तेरा हिज्र की शब फ़ोन रखने से ज़रा पहले बहुत रोते हुए कहना मोहब्बत मर नहीं सकती गए लम्हात फ़ुर्सत के कहाँ से ढूँड कर लाऊँ वो पहरों हाथ पर लिखना मोहब्बत मर नहीं सकती

Wasi Shah

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समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तिरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जब से कोई भी लफ़्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तिरी यादों की ख़ुश्बू खिड़कियों में रक़्स करती है तिरे ग़म में सुलगता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं न जाने हो गया हूँ इस क़दर हस्सास मैं कब से किसी से बात करता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं मैं सारा दिन बहुत मसरूफ़ रहता हूँ मगर ज्यूँँ ही क़दम चौखट पे रखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं हर इक मुफ़्लिस के माथे पर अलम की दास्तानें हैं कोई चेहरा भी पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं बड़े लोगों के ऊँचे बद-नुमा और सर्द महलों को ग़रीब आँखों से तकता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तिरे कूचे से अब मेरा तअ'ल्लुक़ वाजिबी सा है मगर जब भी गुज़रता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं हज़ारों मौसमों की हुक्मरानी है मिरे दिल पर 'वसी' मैं जब भी हँसता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं

Wasi Shah

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