बची है रौशनी जो भी चराग़ों से निकल जाए जो मेरे दिल से निकला है दु'आओं से निकल जाए हम ऐसे लोग जो दुश्मन के रोने पर ठहर जाएँ वो ऐसा शख़्स जो अपनों की लाशों से निकल जाए पढ़ाने का अगर मतलब है हाथों से निकल जाना ख़ुदाया फिर मिरी बेटी भी हाथों से निकल जाए वही इक शख़्स था मेरा यहाँ पर जी लगाने को उसी को चाहते थे सब कि गाँव से निकल जाए इधर तो छू रही है जिस्म मेरा ठंडे हाथों से उधर वो चाहती है रात बातों से निकल जाए नुमाइश बाप की दौलत की कर के सोचता था मैं कि शायद इम्तिहान-ए-इश्क़ पैसों से निकल जाए
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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता
Tehzeeb Hafi
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इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएँ हम तेरे सर की क़सम झूठ ही खाने लग जाएँ इतने सन्नाटे पिए मेरी समा'अत ने कि अब सिर्फ़ आवाज़ पे चाहूँ तो निशाने लग जाएँ चलिए कुछ और नहीं आह-शुमारी ही सही हम किसी काम तो इस दिल के बहाने लग जाएँ हम वो गुम-गश्त-ए-मोहब्बत हैं कि तुम तो क्या हो ख़ुद को हम ढूँडने निकलें तो ज़माने लग जाएँ ख़्वाब कुछ ऐसे दिखाए हैं फ़क़ीरी ने मुझे जिन की ता'बीर में शाहों के ख़ज़ाने लग जाएँ मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मिरे पाँव दबाने लग जाएँ
Mehshar Afridi
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छोड़ कर जाने का दस्तूर नहीं होता था कोई भी ज़ख़्म हो नासूर नहीं होता था मेरे भी होंठ पे सिगरेट नहीं होती थी उस की भी माँग में सिंदूर नहीं होता था औरतें प्यार में तब शौक़ नहीं रखती थी आदमी इश्क़ में मज़दूर नहीं होता था
Kushal Dauneria
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हुस्न इक गुलसिताँ का माली है आँख शहतूत बदन डाली है मैं ने कुछ देर उदासी हँस कर मारी है मार नहीं डाली है साज-ओ-श्रृंगार से चमकाया बदन एक ही नोट वो भी जाली है
Kushal Dauneria
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क्या हो कि मेरी ज़िंदगी से तू निकल सके जिस से कि मेरे दर्द का पहलू निकल सके दरकार इस लिए है मुझे दूसरा बदन उस की दिल-ओ-दिमाग़ से ख़ुशबू निकल सके सब अपनी अपनी लाशों को मंदिर में ले चलो शायद ख़ुदा की आँख से आँसू निकल सके गहरी हुईं जड़ें तो ये शाख़ें हरी हुईं पावँ जमें तो पेड़ के बाज़ू निकल सके मैं उस के बा'द सिर्फ़ इन्हीं कोशिशों में हूँ गर्दन से उस के नाम का टैटू निकल सके अपनी हथेलियों में ये आँखें निचोड़ लूँ मुमकिन है तेरे हिज्र से चुल्लू निकल सके मैं चाहता हूँ रात में सूरज-मुखी खिले मैं चाहता हूँ दिन में भी जुगनू निकल सके
Kushal Dauneria
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कोई हसीं तो कोई दर्दनाक समझेगा मेरा मिजाज़ वही ठीक ठाक समझेगा मैं जिस के साथ कई रातों से हूँ उस का नाम बता तो दूँगा मगर तू मज़ाक़ समझेगा वो जिस हिसाब से गाता है उस से लगता है कि मेरे दुख को तो बस बी प्राक समझेगा
Kushal Dauneria
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आए दिन मुझ सेे ख़फ़ा रहता है दिल को इक डर सा लगा रहता है सारा दिन प्यार करेगा मुझ सेे जैसे तू घर पे बड़ा रहता है सब सेे कहती है तुम्हारा शाइ'र मेरे पहलू में पड़ा रहता है इश्क़ वो खेल है जिस में हर वक़्त जान का ख़तरा बना रहता है
Kushal Dauneria
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तमाम उम्र बचाता रहा ख़ुदा उस को किसी की लग ही गई फिर भी बद-दुआ' उस को वो अपनी ज़िंदगी और दोस्तों में है मसरूफ़ मेरी तमाम परेशानियों से क्या उस को तुम उस से कहना किसी दिन तबाह कर देगा कम उम्र लड़कियों के दिल से खेलना उस को बिछड़ते वक़्त उसे देख कर लगा जैसे हर एक चीज़ का पहले से इल्म था उस को हुनर-शनास किसी दिन क़रार कर देंगे बनाने वाले तिरे फ़न की इंतिहा उस को न जाने कौन सा पेशा है जिस में लगता है हर एक शाम कोई आदमी नया उस को उसे सताएँ मोहब्बत के लौटते मौसम कभी भी रास न आए अमेरिका उस को ख़ुदा मैं भी तिरी इस दुनिया को मिटा दूँगा हमारे झगड़े में कुछ भी अगर हुआ उस को
Kushal Dauneria
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