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dahan ka lab ka zaqan ka jabin ka bosa do hamen to lene se matlab kahin ka bosa do bahut dinon men tumhen bas men daav se laaya jahan jahan ka main mangun vahin ka bosa do na tursh-ru ho na khatte karo hamare daant maza hai hans ke lab-e-shakkarin ka bosa do hazar kijiye inkar main na manunga main sunne vaala nahin huun nahin ka bosa do miri tumhari yahi shart thi jo ki inkar to chaar jiit ke ek us nahin ka bosa do vo bole 'nutq' tiri garmiyon men aag lage kabhi kaha jo rukh-e-atishin ka bosa do dahan ka lab ka zaqan ka jabin ka bosa do hamein to lene se matlab kahin ka bosa do bahut dinon mein tumhein bas mein daw se laya jahan jahan ka main mangun wahin ka bosa do na tursh-ru ho na khatte karo hamare dant maza hai hans ke lab-e-shakkarin ka bosa do hazar kijiye inkar main na manunga main sunne wala nahin hun nahin ka bosa do meri tumhaari yahi shart thi jo ki inkar to chaar jit ke ek us nahin ka bosa do wo bole 'nutq' teri garmiyon mein aag lage kabhi kaha jo rukh-e-atishin ka bosa do

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मेरे लिए तो इश्क़ का वा'दा है शा'इरी आधा सुरूर तुम हो तो आधा है शा'इरी रुद्राक्ष हाथ में है तो सीने में ओम है कृष्णा है मेरा दिल मेरी राधा है शा'इरी अपना तो मेल जोल ही बस आशिकों से है दरवेश का बस एक लबादा है शा'इरी हो आश्ना कोई तो दिखाती है अपना रंग बे रम्ज़ियों के वास्ते सादा है शा'इरी तुम सामने हो और मेरी दस्तरस में हो इस वक़्त मेरे दिल का इरादा है शा'इरी भगवान हो ख़ुदा हो मुहब्बत हो या बदन जिस सम्त भी चलो यही जादा है शा'इरी इस लिए भी इश्क़ ही लिखता हूँ मैं अली मेरा किसी से आख़री वा'दा है शा'इरी

Ali Zaryoun

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ग़ज़ल तो सब को मीठी लग रही थी मगर नातिक को मिर्ची लग रही थी तुम्हारे लब नहीं चू में थे जब तक मुझे हर चीज़ कड़वी लग रही थी मैं जिस दिन छोड़ने वाला था उस को वो उस दिन सब सेे प्यारी लग रही थी

Zubair Ali Tabish

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दो नावों पर पाँव पसारे ऐसे कैसे वो भी प्यारा हम भी प्यारे ऐसे कैसे सूरज बोला बिन मेरे दुनिया अंधी है हँस कर बोले चाँद सितारे ऐसे कैसे तेरे हिस्से की ख़ुशियों से बैर नहीं पर मेरे हक़ में सिर्फ़ ख़सारे ऐसे कैसे गालों पर बोसा दे कर जब चली गई वो कहते रह गए होंठ बिचारे ऐसे कैसे मुझ जैसों को यां पर देख के कहते हैं वो इतना आगे बिना सहारे ऐसे कैसे जैसे ही मक़्ते पर पहुँची ग़ज़ल असद की बोल उठे सारे के सारे ऐसे कैसे

Asad Akbarabadi

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जिन को मालूम नहीं होगा दुआ का मतलब वो हमें ख़ाक बताएँगे ख़ुदा का मतलब वो ये कहते हैं मोहब्बत में सज़ा पाओगे और मैं ख़ूब समझता हूँ सज़ा का मतलब या'नी काँटों से मैं ख़ुशबू के मआ'नी पूछूँ या'नी अब आप बताएँगे वफ़ा का मतलब

Yasir Khan

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तुम्हारा क्या है तुम्हें सिर्फ़ ज्ञान देना है हमारी सोचो हमें इम्तिहान देना है गुलाब भी हैं गुलाबों में ख़ार भी हैं बता निशानी देनी है या फिर निशान देना है तेरा सवाल मेरी जान का सवाल है और जवाब देने से आसान जान देना है उन्होंने अपने मुताबिक़ सज़ा सुना दी है हमें सज़ा के मुताबिक़ बयान देना है ये बेज़ुबानों की महफ़िल है दोस्त याद रहे यहाँ ख़मोशी का मतलब ज़बान देना है

Charagh Sharma

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