दिल की तरह ही अब मिरी दुनिया ख़राब है सो अपना हाल इन दिनों अच्छा ख़राब है आँसू बहे तो यूँँ हुआ बीनाई बढ़ गई फिर साफ़ साफ़ दिख गया क्या क्या ख़राब है पहले-पहल तो मैं तिरा यक-तरफ़ा इश्क़ था अब मेरा हाल तुझ से ज़ियादा ख़राब है दुनिया से तंग शख़्स को अच्छी है ख़ुद-कुशी ग़र्क़ाब होते शख़्स को तिनका ख़राब है तो इश्क़ से मिटाएँगे दुनिया की नफ़रतें 'मिश्रा' जी आप ठीक हैं माथा ख़राब है
Related Ghazal
चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
406 likes
ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
355 likes
उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
465 likes
वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को
Naseer Turabi
244 likes
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है
Shabeena Adeeb
232 likes
More from Ashu Mishra
ज़मीन अपनी है और ईंट गारा उस का है मकान-ए-इश्क़ में हिस्सा हमारा उस का है मैं ये जो साथ लिए फिरता हूँ ख़ज़ाना-ए-इश्क़ अगर वो हाथ उठा दे तो सारा उस का है शुरुअ दिन से ही मैं जंग का मुख़ालिफ़ था मगर मैं क्या करूँँ अब के इशारा उस का है वो दोस्त जिस सेे कि अब बात भी नहीं होती अगर मैं गिर पड़ूँ पहला सहारा उस का है
Ashu Mishra
4 likes
अब और दम न घुटे रौशनी का कमरे में दरीचे वा हों उजालों की दौड़ पूरी हो जो ख़्वाब आएँ तो देखूँ तुझे मैं जी-भर के कि नींद आए तो ख़्वाबों की दौड़ पूरी हो कोई बढ़ाए ज़रा आसमान की वुसअ'त मैं चाहता हूँ परिंदों की दौड़ पूरी हो किसी अज़ाब से रुक जाए रक़्स क़ातिल का घरों को लौटते बच्चों की दौड़ पूरी हो मैं तेरे हिज्र के आलम में जी नहीं सकता सो अब यही हो कि साँसों की दौड़ पूरी हो
Ashu Mishra
0 likes
ऐसे खुलते हैं फ़लक पर ये सितारे शब के जिस तरह फूल हों सारे ये बहार-ए-शब के तेरी तस्वीर बना कर तिरी ज़ुल्फ़ों के लिए हम ने काग़ज़ पे कई रंग उतारे शब के वो मुसव्विर जो बनाता है सहर का चेहरा उस से कहना कि अभी दर्द उभारे शब के क्या किसी शख़्स की हिजरत में जली हैं रातें क्यूँँ शरारों से चमकते हैं सितारे शब के ये तिरे हिज्र ने तोहफ़े में दिए हैं हम को ये जो मा'सूम से रिश्ते हैं हमारे शब के एक मुद्दत से हमें नींद न आई 'आशू' उम्र इक काट दी हम ने भी सहारे शब के
Ashu Mishra
0 likes
सुर आप के बिल्कुल मेरी लय से नहीं मिलते बस इस लिए हम मिलने के जैसे नहीं मिलते अलगाव का दुख दाइमी दुख है तो मेरी जान लेकिन ये मज़े दूसरी शय से नहीं मिलते होंठों पे रखा रह गया इनकार-ए-मुलाक़ात जब उस ने कहा देखूँगी कैसे नहीं मिलते अवल्ल तो मुहब्बत में मेरा जी नहीं लगता और दूसरा इस काम के पैसे नहीं मिलते
Ashu Mishra
13 likes
जो पर्दादारी चली तो यारी नहीं चलेगी हमारी दुनिया में दुनियादारी नहीं चलेगी तुम्हारे जाने पे दिल का दफ़्तर समेट लेंगे फिर इस सड़क पर कोई सवारी नहीं चलेगी परिंदे भी बे-घरी से पहले ये सोचते थे कि सब्ज़ पेड़ों पे कोई आरी नहीं चलेगी हम अपनी मर्ज़ी से उस के दिल में रहा करेंगे हमारे घर में भी क्या हमारी नहीं चलेगी तुम्हारी चीखों से वो दरीचा नहीं खुलेगा बड़ी दुकानों पे रेज़गारी नहीं चलेगी हुज़ूर-ए-वाला ये आशू मिश्रा का दिल है इसपर हसीन चेहरों की होशियारी नहीं चलेगी
Ashu Mishra
15 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ashu Mishra.
Similar Moods
More moods that pair well with Ashu Mishra's ghazal.







