ghazalKuch Alfaaz

gunahon se nashv-o-numa pa gaya dil dar-e-pukhta-kari pe pahuncha gaya dil agar zindagi mukhtasar thi to phir kya isi men bahut aish karta gaya dil ye nannhi si vusat ye nadan hasti nae se naya bhed kahta gaya dil na tha koi maabud par rafta rafta khud apna hi maabud banta gaya dil nahin girya o khanda men farq koi jo rota gaya dil to hansta gaya dil bajae dil ik talkh aansu rahega agar un ki mahfil men aaya gaya dil pareshan raha aap to fikr kya hai mila jis se bhi us ko bahla gaya dil kai raaz pinhan hain lekin khulenge agar hashr ke roz pakda gaya dil bahut ham bhi chalak bante the lekin hamen baton baton men bahka gaya dil kahi baat jab kaam ki 'mira-ji' ne vahin baat ko jhat se palta gaya dil gunahon se nashw-o-numa pa gaya dil dar-e-pukhta-kari pe pahuncha gaya dil agar zindagi mukhtasar thi to phir kya isi mein bahut aish karta gaya dil ye nannhi si wusat ye nadan hasti nae se naya bhed kahta gaya dil na tha koi mabud par rafta rafta khud apna hi mabud banta gaya dil nahin girya o khanda mein farq koi jo rota gaya dil to hansta gaya dil bajae dil ek talkh aansu rahega agar un ki mahfil mein aaya gaya dil pareshan raha aap to fikr kya hai mila jis se bhi us ko bahla gaya dil kai raaz pinhan hain lekin khulenge agar hashr ke roz pakda gaya dil bahut hum bhi chaalak bante the lekin hamein baaton baaton mein bahka gaya dil kahi baat jab kaam ki 'mira-ji' ne wahin baat ko jhat se palta gaya dil

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उस के हाथों में जो ख़ंजर है ज़्यादा तेज है और फिर बचपन से ही उस का निशाना तेज है जब कभी उस पार जाने का ख़याल आता मुझे कोई आहिस्ता से कहता था की दरिया तेज है आज मिलना था बिछड़ जाने की निय्यत से हमें आज भी वो देर से पहुँचा है कितना तेज है अपना सब कुछ हार के लौट आए हो न मेरे पास मैं तुम्हें कहता भी रहता की दुनिया तेज है आज उस के गाल चू में हैं तो अंदाज़ा हुआ चाय अच्छी है मगर थोडा सा मीठा तेज है

Tehzeeb Hafi

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चल दिए फेर कर नज़र तुम भी ग़ैर तो ग़ैर थे मगर तुम भी ये गली मेरे दिलरुबा की है दोस्तों ख़ैरियत इधर तुम भी मुझ पे लोगों के साथ हँसते हो लोग रोएँगे ख़ास कर तुम भी मुझ को ठुकरा दिया है दुनिया ने मैं तो मर जाऊँगा अगर तुम भी उस की गाड़ी तो जा चुकी 'ताबिश' अब उठो जाओ अपने घर तुम भी

Zubair Ali Tabish

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महीनों बा'द दफ्तर आ रहे हैं हम एक सद में से बाहर आ रहे हैं तेरी बाहों से दिल उकता गया हैं अब इस झूले में चक्कर आ रहे हैं कहाँ सोया है चौकीदार मेरा ये कैसे लोग अंदर आ रहे हैं समुंदर कर चुका तस्लीम हम को खजाने ख़ुद ही ऊपर आ रहे हैं यही एक दिन बचा था देखने को उसे बस में बिठा कर आ रहे हैं

Tehzeeb Hafi

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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नगरी नगरी फिरा मुसाफ़िर घर का रस्ता भूल गया क्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया क्या भूला कैसे भूला क्यूँँ पूछते हो बस यूँँ समझो कारन दोश नहीं है कोई भूला भाला भूल गया कैसे दिन थे कैसी रातें कैसी बातें घातें थीं मन बालक है पहले प्यार का सुंदर सपना भूल गया अँधियारे से एक किरन ने झाँक के देखा शरमाई धुँदली छब तो याद रही कैसा था चेहरा भूल गया याद के फेर में आ कर दिल पर ऐसी कारी चोट लगी दुख में सुख है सुख में दुख है भेद ये न्यारा भूल गया एक नज़र की एक ही पल की बात है डोरी साँसों की एक नज़र का नूर मिटा जब इक पल बीता भूल गया सूझ-बूझ की बात नहीं है मन-मौजी है मस्ताना लहर लहर से जा सर पटका सागर गहरा भूल गया

Meeraji

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