ghazalKuch Alfaaz

कल उस की आरती मैं ने उतारी मगर मत पूछना कैसे उतारी गले तक आ गई थी बात मेरे सो पानी पी लिया, नीचे उतारी उसे भी मौत ने कुछ दिन पुकारा वो जिस ने लाश पंखे से उतारी

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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं

Ali Zaryoun

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चमचमाती कार में उस की बिदाई हो गई पर यक़ीन आता नहीं है बेवफ़ाई हो गई पार्क में सब दोस्त मेरे राह देखें हैं मेरी अब तो जाने दो मुझे अब तो पढ़ाई हो गई आदमी को और बच्चों को पता चलता नहीं रोटी सब्ज़ी कब बनी और कब सफ़ाई हो गई आओ बैठो अब सुनो तारीफ़ मेरी दोस्तों जिस ने छोड़ा है मुझे उस की बुराई हो गई आख़री चोटी से गिरकर हम मरे हैं इश्क़ की हम समझते थे हिमालय की चढ़ाई हो गई

Tanoj Dadhich

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कल तक जो शख़्स साथ मेरे था चला गया ऐसा लगा कि आँख में तिनका चला गया मिलने वो आए और अकेले ही आए हैं या'नी कि कैच छूट के चौका चला गया मैं बोल जब रहा था नहीं रोक पाए वो सो रात भर मैं शे'र सुनाता चला गया कमज़ोरियाँ बता के उसे सोचता हूँ मैं आटे में पानी हद से ज़ियादा चला गया बे-फ़िक्र था 'तनोज' ख़बर ही नहीं हुई वो पास आया, दिल को निकाला, चला गया

Tanoj Dadhich

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समझती है ग़ज़ल दुनिया कि दिल नादान है यारों इसे भी आदमी की अब ज़रा पहचान है यारों विरोधी टीम में था तो उसे बाहर बिठाते थे हमारी टीम में आ कर बना कप्तान है यारों तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई मिलेंगे फूल सब इस में ग़ज़ल गुलदान है यारों ख़ुदा की बात है तो फिर मेरा कहना है बस इतना किताबी ज्ञान से बेहतर ज़रा सा ध्यान है यारों पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के दो बच्चे हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों

Tanoj Dadhich

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कोई गाली नहीं देता कोई ग़ुस्सा नहीं होता तो मैं मशहूर तो होता मगर इतना नहीं होता हम उस को घर नहीं कहते भले कितना बड़ा ही हो जहाँ तुलसी नहीं होती जहाँ मटका नहीं होता बुला लो सब बड़े शाइ'र मगर इक दो नए रखना शगुन पूरा नहीं होता अगर सिक्का नहीं होता ज़माना है नया अब वो मुहब्बत कर नहीं सकता वो जिस सेे एक भी रुपया कभी ख़र्चा नहीं होता तनोज इस बार तो लाओ नयापन शे'र में अपने कि बस इक नाम लिखने से कोई मक़्ता नहीं होता

Tanoj Dadhich

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एक भयानक तूफ़ाँ आया पूरा छप्पर उड़ा दिया लेकिन फिर मेरी हिम्मत ने सारा मंज़र उड़ा दिया जितना पैसा लाई थी वो हफ़्तों तक बर्तन धोके उस के शौहर ने इक दिन में दारू पी कर उड़ा दिया हार गए जब दुनिया के सब वीर बहादुर और राजा इक लड़के ने धनुष उठाया और स्वयंवर उड़ा दिया हैरानी से दंग हुए तब जादू देख रहे सब लोग एक कबूतर ने ग़ुस्से में जब जादूगर उड़ा दिया डूब चुके थे उस की आँखों में हम इतने, मत पूछो क्या बतलाएँ चिड़िया उड़ में हम ने बन्दर उड़ा दिया

Tanoj Dadhich

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