किसी की आँख में ख़ुद को तलाश करना है फिर उस के ब'अद हमें आइनों से डरना है फ़लक की बंद गली के फ़क़ीर हैं तारे! कि घूम फिर के यहीं से उन्हें गुज़रना है जो ज़िंदगी थी मिरी जान! तेरे साथ गई बस अब तो उम्र के नक़्शे में वक़्त भरना है जो तुम चलो तो अभी दो क़दम में कट जाए जो फ़ासला मुझे सदियों में पार करना है तो क्यूँँ न आज यहीं पर क़याम हो जाए कि शब क़रीब है आख़िर कहीं ठहरना है वो मेरा सैल-ए-तलब हो कि तेरी रा'नाई चढ़ा है जो भी समुंदर उसे उतरना है सहर हुई तो सितारों ने मूँद लीं आँखें वो क्या करें कि जिन्हें इंतिज़ार करना है ये ख़्वाब है कि हक़ीक़त ख़बर नहीं 'अमजद' मगर है जीना यहीं पर यहीं पे मरना है
Related Ghazal
वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को
Naseer Turabi
244 likes
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है
Shabeena Adeeb
232 likes
कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला
Tehzeeb Hafi
435 likes
उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
465 likes
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें
Ahmad Faraz
130 likes
More from Amjad Islam Amjad
पर्दे में लाख फिर भी नुमूदार कौन है है जिस के दम से गर्मी-ए-बाज़ार कौन है वो सामने है फिर भी दिखाई न दे सके मेरे और उस के बीच ये दीवार कौन है बाग़-ए-वफ़ा में हो नहीं सकता ये फ़ैसला सय्याद याँ पे कौन गिरफ़्तार कौन है माना नज़र के सामने है बे-शुमार धुँद है देखना कि धुँद के इस पार कौन है कुछ भी नहीं है पास पे रहता है फिर भी ख़ुश सब कुछ है जिस के पास वो बेज़ार कौन है यूँँ तो दिखाई देते हैं असरार हर तरफ़ खुलता नहीं कि साहिब-ए-असरार कौन है 'अमजद' अलग सी आप ने खोली है जो दुकाँ जिंस-ए-हुनर का याँ ये ख़रीदार कौन है
Amjad Islam Amjad
0 likes
याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र सोचता हूँ अब बना लूँ रेत से ही कोई घर किस क़दर यादें उभर आई हैं तेरे नाम से एक पत्थर फेंकने से पड़ गए कितने भँवर वक़्त के अंधे कुएँ में पल रही है ज़िंदगी ऐ मिरे हुस्न-ए-तख़य्युल बाम से नीचे उतर तू असीर-ए-आबरू-ए-शेवा-ए-पिंदार-ए-हुस्न मैं गिरफ़्तार-ए-निगाह-ए-ज़िंदगी-ए-मुख़्तसर ज़ब्त के क़र्ये में 'अमजद' देखिए कैसे कटे सोच की सूनी सड़क पर याद का लम्बा सफ़र
Amjad Islam Amjad
0 likes
तुम्हारा हाथ जब मेरे लरज़ते हाथ से छूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे वो मोहकम बे-लचक वा'दा खिलौने की तरह टूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे बहार आई न थी लेकिन हवाओं में नए मौसम की ख़ुश्बू रक़्स करती थी अचानक जब कहा तुम ने मिरे मुँह पर मुझे झूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे वो क्या दिन थे यहीं हम ने बहारों की दुआ की थी किसी ने भी नहीं सोचा चमन वालों ने मिल कर जब ख़ुद अपना ही चमन लूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे लिखा था एक तख़्ती पर कोई भी फूल मत तोड़े मगर आँधी तो अन-पढ़ थी सो जब वो बाग़ से गुज़री कोई उखड़ा कोई टूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे बहुत ही ज़ोर से पीटे हवा के बैन पर सीने हमारे ख़ैर-ख़्वाहों ने कि चाँदी के वरक़ जैसा समय ने जब हमें कूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे न रुत थी आँधियों की ये न मौसम था हवाओं का तो फिर ये क्या हुआ 'अमजद' हर इक कोंपल हुई ज़ख़्मी हुआ मजरूह हर बूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे
Amjad Islam Amjad
0 likes
अगरचे कोई भी अंधा नहीं था लिखा दीवार का पढ़ता नहीं था कुछ ऐसी बर्फ़ थी उस की नज़र में गुज़रने के लिए रस्ता नहीं था तुम्हीं ने कौन सी अच्छाई की है चलो माना कि मैं अच्छा नहीं था खुली आँखों से सारी उम्र देखा इक ऐसा ख़्वाब जो अपना नहीं था मैं उस की अंजुमन में था अकेला किसी ने भी मुझे देखा नहीं था सहर के वक़्त कैसे छोड़ जाता तुम्हारी याद थी सपना नहीं था खड़ी थी रात खिड़की के सिरहाने दरीचे में वो चाँद उतरा नहीं था दिलों में गिरने वाले अश्क चुनता कहीं इक जौहरी ऐसा नहीं था कुछ ऐसी धूप थी उन के सरों पर ख़ुदा जैसे ग़रीबों का नहीं था अभी हर्फ़ों में रंग आते कहाँ से अभी मैं ने उसे लिक्खा नहीं था थी पूरी शक्ल उस की याद मुझ को मगर मैं ने उसे देखा नहीं था बरहना ख़्वाब थे सूरज के नीचे किसी उम्मीद का पर्दा नहीं था है 'अमजद' आज तक वो शख़्स दिल में कि जो उस वक़्त भी मेरा नहीं था
Amjad Islam Amjad
0 likes
तश्हीर अपने दर्द की हर सू कराइए जी चाहता है मिन्नत-ए-तिफ़्लाँ उठाइए ख़ुश्बू का हाथ थाम के कीजे तलाश-ए-रंग पाँव के नक़्श देख के रस्ता बनाइए फिर आज पत्थरों से मुलाक़ात कीजिए फिर आज सत्ह-ए-आब पे चेहरे बनाइए हर इंकिशाफ़ दर्द के पर्दे में आएगा गर हो सके तो ख़ुद से भी ख़ुद को छुपाए फूलों का रास्ता नहीं यारो मिरा सफ़र पाँव अज़ीज़ हैं तो अभी लूट जाइए कब तक हिना के नाम पे देते रहें लहू कब तक निगार-ए-दर्द को दुल्हन बनाइए 'अमजद' मता-ए-उम्र ज़रा देख-भाल के ऐसा न हो कि बा'द में आँसू बहाइए
Amjad Islam Amjad
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Amjad Islam Amjad.
Similar Moods
More moods that pair well with Amjad Islam Amjad's ghazal.







