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labon par yunhi si hansi bhej de mujhe meri pahli khushi bhej de andhera hai kaise tira khat padhun lifafe men kuchh raushni bhej de main pyasa huun khali kuaan hai to kya surahi liye ik pari bhej de bahut nek bande hain ab bhi tire kisi par to ya-rab vahi bhej de kahin kho na jaae qayamat ka din ye achchha samay hai abhi bhej de labon par yunhi si hansi bhej de mujhe meri pahli khushi bhej de andhera hai kaise tera khat padhun lifafe mein kuchh raushni bhej de main pyasa hun khali kuan hai to kya surahi liye ek pari bhej de bahut nek bande hain ab bhi tere kisi par to ya-rab wahi bhej de kahin kho na jae qayamat ka din ye achchha samay hai abhi bhej de

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे

Tehzeeb Hafi

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

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उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

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किया बादलों में सफ़र ज़िंदगी भर ज़मीं पर बनाया न घर ज़िंदगी भर सभी ज़िंदगी के मज़े लूटते हैं न आया हमें ये हुनर ज़िंदगी भर मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में रहा चार दिन का असर ज़िंदगी भर

Anwar Shaoor

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धूप ने गुज़ारिश की एक बूँद बारिश की लो गले पड़े काँटे क्यूँँ गुलों की ख़्वाहिश की जगमगा उठे तारे बात थी नुमाइश की इक पतिंगा उजरत थी छिपकिली की जुम्बिश की हम तवक़्क़ो' रखते हैं और वो भी बख़्शिश की लुत्फ़ आ गया 'अल्वी' वाह ख़ूब कोशिश की

Mohammad Alvi

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दिन इक के बा'द एक गुज़रते हुए भी देख इक दिन तू अपने आप को मरते हुए भी देख हर वक़्त खिलते फूल की जानिब तका न कर मुरझा के पत्तियों को बिखरते हुए भी देख हाँ देख बर्फ़ गिरती हुई बाल बाल पर तपते हुए ख़याल ठिठुरते हुए भी देख अपनों में रह के किस लिए सहमा हुआ है तू आ मुझ को दुश्मनों से न डरते हुए भी देख पैवंद बादलों के लगे देख जा-ब-जा बगलों को आसमान कतरते हुए भी देख हैरान मत हो तैरती मछली को देख कर पानी में रौशनी को उतरते हुए भी देख उस को ख़बर नहीं है अभी अपने हुस्न की आईना दे के बनते-सँवरते हुए भी देख देखा न होगा तू ने मगर इंतिज़ार में चलते हुए समय को ठहरते हुए भी देख ता'रीफ़ सुन के दोस्त से 'अल्वी' तू ख़ुश न हो उस को तिरी बुराइयाँ करते हुए भी देख

Mohammad Alvi

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