ghazalKuch Alfaaz

मैं उस से बात करने जा चुका था मगर वो शख़्स आगे जा चुका था मुझे दरिया ने फिर ऊपर बुलाया मैं उस की हद से नीचे जा चुका था तिरे नक़्श-ए-क़दम पर चलते चलते मैं तुझ से कितना आगे जा चुका था पढ़ाई ख़त्म कर के जब मैं लौटा कोई अफ़सर उसे ले जा चुका था वो चलने को तो राज़ी हो गई थी मगर जब मैं अकेले जा चुका था सदाएँ दे रहा था वो पलट कर मगर मैं अपने रस्ते जा चुका था मैं ख़ुद को रोक भी सकता था 'ताबिश' कि मेरा वक़्त पीछे जा चुका था

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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

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बे-क़रारी सी बे-क़रारी है अब यही ज़िंदगी हमारी है मैं ने उस को पिछाड़ना है मियाँ मेरी साए से जंग जारी है इश्क़ करना भी लाज़मी है मगर मुझ पे घर की भी ज़िम्मेदारी है प्यार है मुझ को ज़िंदगी से बहुत और तू ज़िंदगी से प्यारी है मैं कभी ख़ुद को छोड़ता ही नहीं मेरी ख़ुद से अलग सी यारी है शहर का शहर सो गया 'ताबिश' अब मिरे जागने की बारी है

Tousief Tabish

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आइने के रू-ब-रू इक आइना रखता हूँ मैं रात-दिन हैरत में ख़ुद को मुब्तला रखता हूँ मैं दोस्तों वाली भी इक ख़ूबी है उन में इस लिए दुश्मनों से भी मुसलसल राब्ता रखता हूँ मैं रोज़-ओ-शब मैं घूमता हूँ वक़्त की पुर-कार पर अपने चारों सम्त कोई दायरा रखता हूँ मैं खटखटाने की भी ज़हमत कोई आख़िर क्यूँँ करे इस लिए भी घर का दरवाज़ा खुला रखता हूँ मैं आज-कल ख़ुद से भी है रंजिश का कोई सिलसिला आज-कल ख़ुद से भी थोड़ा फ़ासला रखता हूँ मैं चंद यादें एक चेहरा एक ख़्वाहिश एक ख़्वाब अपने दिल में और क्या उन के सिवा रखता हूँ मैं चंद तस्वीरें किताबें ख़ुशबुएँ और एक फूल अपनी अलमारी में 'ताबिश' और क्या रखता हूँ मैं

Tousief Tabish

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कुछ ने आँखें कुछ ने चेहरा देखा है सब ने तुझ को थोड़ा थोड़ा देखा है तुम पर प्यास के मा'नी खुलने वाले नहीं तुम ने पानी पी कर दरिया देखा है जिन हाथों को चूमने आ जाते थे लोग आज उन्हीं हाथों में कासा देखा है रोती आँखें ये सुन कर ख़ामोश हुईं मलबे में इक शख़्स को ज़िंदा देखा है बाबा बोला मेरी क़िस्मत अच्छी है उस ने शायद हाथ तुम्हारा देखा है लगता है मैं प्यास से मरने वाला हूँ मैं ने कल शब ख़्वाब में सहरा देखा है अंधी दुनिया को मैं कैसे समझाऊँ इन आँखों से मैं ने क्या क्या देखा है क़ैदी रात को भागने वाला है 'ताबिश' उस ने ख़्वाब में ख़ुफ़िया रस्ता देखा है

Tousief Tabish

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