"प्रीत" ये मुहब्बत जब बे-हिसाब होती है लब गुलाब, क़ातिल आँखें शराब होती हैं तुम वहाँ कभी जो बीमार होते हो, जानाँ हालतें यहाँ मेरी भी ख़राब होती हैं प्यार के बिना सजदों में असर नहीं आता सारी कोशिशें ही नाकामयाब होती हैं प्यार गर बड़ी शिद्दत से निभाया जाए तो बा'द उस के नफ़रत भी लाज़वाब होती है
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थोड़ा लिक्खा और ज़ियादा छोड़ दिया आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुज़री तुम ने तो बस पानी भरना छोड़ दिया लड़कियाँ इश्क़ में कितनी पागल होती हैं फ़ोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया रोज़ इक पत्ता मुझ में आ गिरता है जब से मैं ने जंगल जाना छोड़ दिया बस कानों पर हाथ रखे थे थोड़ी देर और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिए
Tehzeeb Hafi
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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया यूँँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया इतना मीठा था वो ग़ुस्से भरा लहजा मत पूछ उस ने जिस को भी जाने का कहा, बैठ गया अपना लड़ना भी मोहब्बत है तुम्हें इल्म नहीं चीख़ती तुम रही और मेरा गला बैठ गया उस की मर्ज़ी वो जिसे पास बिठा ले अपने इस पे क्या लड़ना फुलाँ मेरी जगह बैठ गया बात दरियाओं की, सूरज की, न तेरी है यहाँ दो क़दम जो भी मेरे साथ चला बैठ गया बज़्म-ए-जानाँ में नशिस्तें नहीं होतीं मख़्सूस जो भी इक बार जहाँ बैठ गया बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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मेरा ख़ज़ाना ज़माने के हाथ जा न लगे तुझे किसी की किसी को तेरी हवा न लगे मैं एक जिस्म को चखना तो चाहता हूँ मगर कुछ इस तरह कि मेरे मुँह को ज़ाएका न लगे हमें लगा सो लगा ख़ुद-अज़िय्यती का नशा दुआ करो कि तुम्हें बद-दुआ दुआ न लगे दुआ करो कि किसी का न दिल लगे तुम सेे लगे तो और किसी से लगा हुआ न लगे हसद किया हो तेरे रिज़्क़ से कभी मैं ने तो मुझ को अपनी कमाई हुई ग़िज़ा न लगे हमें ही इश्क़ की तशहीर चाहिए वरना पता न लगने दिया जाए तो पता न लगे पड़ा रहा मैं किसी और ही बखेड़े में बहुत से क़ीमती जज़्बे किसी दिशा न लगे बना रहा हूँ तसव्वुर में एक मुद्दत से एक ऐसा शहर जिसे कोई रास्ता न लगे हमें तो उस सेे मुहब्बत है और बेहद है अगर उसे नहीं लगता तो क्या हुआ न लगे किसे ख़ुशी नहीं होती सराहे जाने की मगर वो दोस्त ही क्या है जो आइना न लगे कभी कभार जो रखने लगे ज़बाँ का भरम वो अब भी क्या नहीं लगता मजीद क्या न लगे यही कहूँगा कि 'जव्वाद' बच बचा के ज़रा अगर किसी का रवैया बरादरा न लगे
Jawwad Sheikh
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अज़िय्यत है कि रोज़-ओ-शब घुटन महसूस होती है भले हों पास मेरे सब घुटन महसूस होती है घुटन मेरी दीवानी है घुटन का मैं दीवाना हूँ ज़माने को बिना मतलब घुटन महसूस होती है मुझे तुझ पर नहीं ख़ुद पर बहुत अफ़सोस होता है तेरे होते हुए भी जब घुटन महसूस होती है वही जिस बाग़ में सब लोग ताज़ा साँस लेते हैं मुझे उस बाग़ में भी अब घुटन महसूस होती है
Ahmad Abdullah
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कल शब लिबास उस ने जो पहना गुलाब का ख़ुशबू गुलाब की कहीं चर्चा गुलाब का देखी हसीन लोगों की औलाद भी हसीन पौधे से उगता देखा है पौधा गुलाब का मैं था गुलाब तोड़ने वालों के शहर से और उस को चाहिए था बगीचा गुलाब का सुनते हो आज टूट गया लाडले का दिल अब उस के आगे ज़िक्र न करना गुलाब का
Kushal Dauneria
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