ghazalKuch Alfaaz

समझती है ग़लत दुनिया कि दिल नादान है यारों इसे भी आदमी की अब ज़रा पहचान है यारों विरोधी टीम में था तो उसे बाहर बिठाते थे हमारी टीम में आ कर बना कप्तान है यारों तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई मिलेंगे फूल सब इस में ग़ज़ल गुलदान है यारों ख़ुदा की बात है तो फिर मेरा कहना है बस इतना किताबी ज्ञान से बेहतर ज़रा सा ध्यान है यारों पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के बा'द दो बच्चे हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों

Related Ghazal

उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

465 likes

चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

406 likes

ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

355 likes

इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएँ हम तेरे सर की क़सम झूठ ही खाने लग जाएँ इतने सन्नाटे पिए मेरी समा'अत ने कि अब सिर्फ़ आवाज़ पे चाहूँ तो निशाने लग जाएँ चलिए कुछ और नहीं आह-शुमारी ही सही हम किसी काम तो इस दिल के बहाने लग जाएँ हम वो गुम-गश्त-ए-मोहब्बत हैं कि तुम तो क्या हो ख़ुद को हम ढूँडने निकलें तो ज़माने लग जाएँ ख़्वाब कुछ ऐसे दिखाए हैं फ़क़ीरी ने मुझे जिन की ता'बीर में शाहों के ख़ज़ाने लग जाएँ मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मिरे पाँव दबाने लग जाएँ

Mehshar Afridi

173 likes

आँख को आइना समझते हो तुम भी सबकी तरह समझते हो दोस्त अब क्यूँ नहीं समझते तुम तुम तो कहते थे ना समझते हो अपना ग़म तुम को कैसे समझाऊँ सब सेे हारा हुआ समझते हो मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो

Himanshi babra KATIB

76 likes

More from Tanoj Dadhich

कल उस की आरती मैं ने उतारी मगर मत पूछना कैसे उतारी गले तक आ गई थी बात मेरे सो पानी पी लिया, नीचे उतारी उसे भी मौत ने कुछ दिन पुकारा वो जिस ने लाश पंखे से उतारी

Tanoj Dadhich

11 likes

चमचमाती कार में उस की बिदाई हो गई पर यक़ीन आता नहीं है बेवफ़ाई हो गई पार्क में सब दोस्त मेरे राह देखें हैं मेरी अब तो जाने दो मुझे अब तो पढ़ाई हो गई आदमी को और बच्चों को पता चलता नहीं रोटी सब्ज़ी कब बनी और कब सफ़ाई हो गई आओ बैठो अब सुनो तारीफ़ मेरी दोस्तों जिस ने छोड़ा है मुझे उस की बुराई हो गई आख़री चोटी से गिरकर हम मरे हैं इश्क़ की हम समझते थे हिमालय की चढ़ाई हो गई

Tanoj Dadhich

13 likes

कई लोगों से बेहतर हँस रहा है अगर तू अपने ऊपर हँस रहा है दशानन के अहम को तोड़ कर के बहुत छोटा सा बंदर हँस रहा है मुझे कोई नहीं ख़त भेजता अब मेरी छत का कबूतर हँस रहा है मुक़द्दर पर ये मेहनत हँस रही है ? या मेहनत पर मुक़द्दर हँस रहा है ? हज़ारों ग़म हैं उस की ज़िन्दगी में मगर फिर भी सुख़न-वर हँस रहा है कहा मैं ने कि दुनिया जीतनी है न जाने क्यूँ सिकन्दर हँस रहा है

Tanoj Dadhich

27 likes

कल तक जो शख़्स साथ मेरे था चला गया ऐसा लगा कि आँख में तिनका चला गया मिलने वो आए और अकेले ही आए हैं या'नी कि कैच छूट के चौका चला गया मैं बोल जब रहा था नहीं रोक पाए वो सो रात भर मैं शे'र सुनाता चला गया कमज़ोरियाँ बता के उसे सोचता हूँ मैं आटे में पानी हद से ज़ियादा चला गया बे-फ़िक्र था 'तनोज' ख़बर ही नहीं हुई वो पास आया, दिल को निकाला, चला गया

Tanoj Dadhich

17 likes

समझती है ग़ज़ल दुनिया कि दिल नादान है यारों इसे भी आदमी की अब ज़रा पहचान है यारों विरोधी टीम में था तो उसे बाहर बिठाते थे हमारी टीम में आ कर बना कप्तान है यारों तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई मिलेंगे फूल सब इस में ग़ज़ल गुलदान है यारों ख़ुदा की बात है तो फिर मेरा कहना है बस इतना किताबी ज्ञान से बेहतर ज़रा सा ध्यान है यारों पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के दो बच्चे हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों

Tanoj Dadhich

5 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Tanoj Dadhich.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Tanoj Dadhich's ghazal.