shabnam hai ki dhoka hai ki jharna hai ki tum ho dil-dasht men ik pyaas tamasha hai ki tum ho ik lafz men bhatka hua shair hai ki main huun ik ghhaib se aaya hua misraa hai ki tum ho darvaza bhi jaise miri dhadkan se juda hai dastak hi batati hai paraya hai ki tum ho ik dhuup se uljha hua saaya hai ki main huun ik shaam ke hone ka bharosa hai ki tum ho main huun bhi to lagta hai ki jaise main nahin huun tum ho bhi nahin aur ye lagta hai ki tum ho shabnam hai ki dhoka hai ki jharna hai ki tum ho dil-dasht mein ek pyas tamasha hai ki tum ho ek lafz mein bhatka hua shair hai ki main hun ek ghaib se aaya hua misra hai ki tum ho darwaza bhi jaise meri dhadkan se juda hai dastak hi batati hai paraya hai ki tum ho ek dhup se uljha hua saya hai ki main hun ek sham ke hone ka bharosa hai ki tum ho main hun bhi to lagta hai ki jaise main nahin hun tum ho bhi nahin aur ye lagta hai ki tum ho
Related Ghazal
उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
465 likes
यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
526 likes
मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता
Tehzeeb Hafi
456 likes
चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
406 likes
क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
371 likes
More from Ahmad Salman
शबनम है कि धोका है कि झरना है कि तुम हो दिल-दश्त में इक प्यास तमाशा है कि तुम हो इक लफ़्ज़ में भटका हुआ शाइ'र है कि मैं हूँ इक ग़ैब से आया हुआ मिस्रा है कि तुम हो दरवाज़ा भी जैसे मिरी धड़कन से जुड़ा है दस्तक ही बताती है पराया है कि तुम हो इक धूप से उलझा हुआ साया है कि मैं हूँ इक शाम के होने का भरोसा है कि तुम हो मैं हूँ भी तो लगता है कि जैसे मैं नहीं हूँ तुम हो भी नहीं और ये लगता है कि तुम हो
Ahmad Salman
6 likes
जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे जब अपनी अपनी मोहब्बतों के अज़ाब झेले तो लोग समझे वो जिन दरख़्तों की छाँव में से मुसाफ़िरों को उठा दिया था उन्हीं दरख़्तों पे अगले मौसम जो फल न उतरे तो लोग समझे उस एक कच्ची सी उम्र वाली के फ़लसफ़े को कोई न समझा जब उस के कमरे से लाश निकली ख़ुतूत निकले तो लोग समझे वो ख़्वाब थे ही चँबेलियों से सो सब ने हाकिम की कर ली बै'अत फिर इक चँबेली की ओट में से जो साँप निकले तो लोग समझे वो गाँव का इक ज़ईफ़ दहक़ाँ सड़क के बनने पे क्यूँँ ख़फ़ा था जब उन के बच्चे जो शहर जा कर कभी न लौटे तो लोग समझे
Ahmad Salman
28 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ahmad Salman.
Similar Moods
More moods that pair well with Ahmad Salman's ghazal.







