उस की क़ुर्बत में हुआ है ये ख़सारा मेरा आप पढ़ लीजिए हर आँख में क़िस्सा मेरा हर नई साँस पे बनता हूँ बिगड़ जाता हूँ ये हवा ख़त्म ही कर दे न तमाशा मेरा अब तो होंटों पे कभी फूल भी खिल जाते हैं आप ने इन दिनों देखा नहीं चेहरा मेरा मैं ने रो रो के उसे ग़ैर का होने न दिया उस बला-ख़ेज़ को ज़ंजीर था गिर्या मेरा अब नए दश्त मुझे देख के डर जाते हैं मेरी वहशत ने बढ़ा रक्खा है रुत्बा मेरा
Related Ghazal
उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
465 likes
यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
526 likes
मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता
Tehzeeb Hafi
456 likes
चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
406 likes
क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
371 likes
More from Ashu Mishra
ज़मीन अपनी है और ईंट गारा उस का है मकान-ए-इश्क़ में हिस्सा हमारा उस का है मैं ये जो साथ लिए फिरता हूँ ख़ज़ाना-ए-इश्क़ अगर वो हाथ उठा दे तो सारा उस का है शुरुअ दिन से ही मैं जंग का मुख़ालिफ़ था मगर मैं क्या करूँँ अब के इशारा उस का है वो दोस्त जिस सेे कि अब बात भी नहीं होती अगर मैं गिर पड़ूँ पहला सहारा उस का है
Ashu Mishra
4 likes
अब और दम न घुटे रौशनी का कमरे में दरीचे वा हों उजालों की दौड़ पूरी हो जो ख़्वाब आएँ तो देखूँ तुझे मैं जी-भर के कि नींद आए तो ख़्वाबों की दौड़ पूरी हो कोई बढ़ाए ज़रा आसमान की वुसअ'त मैं चाहता हूँ परिंदों की दौड़ पूरी हो किसी अज़ाब से रुक जाए रक़्स क़ातिल का घरों को लौटते बच्चों की दौड़ पूरी हो मैं तेरे हिज्र के आलम में जी नहीं सकता सो अब यही हो कि साँसों की दौड़ पूरी हो
Ashu Mishra
0 likes
ऐसे खुलते हैं फ़लक पर ये सितारे शब के जिस तरह फूल हों सारे ये बहार-ए-शब के तेरी तस्वीर बना कर तिरी ज़ुल्फ़ों के लिए हम ने काग़ज़ पे कई रंग उतारे शब के वो मुसव्विर जो बनाता है सहर का चेहरा उस से कहना कि अभी दर्द उभारे शब के क्या किसी शख़्स की हिजरत में जली हैं रातें क्यूँँ शरारों से चमकते हैं सितारे शब के ये तिरे हिज्र ने तोहफ़े में दिए हैं हम को ये जो मा'सूम से रिश्ते हैं हमारे शब के एक मुद्दत से हमें नींद न आई 'आशू' उम्र इक काट दी हम ने भी सहारे शब के
Ashu Mishra
0 likes
सुर आप के बिल्कुल मेरी लय से नहीं मिलते बस इस लिए हम मिलने के जैसे नहीं मिलते अलगाव का दुख दाइमी दुख है तो मेरी जान लेकिन ये मज़े दूसरी शय से नहीं मिलते होंठों पे रखा रह गया इनकार-ए-मुलाक़ात जब उस ने कहा देखूँगी कैसे नहीं मिलते अवल्ल तो मुहब्बत में मेरा जी नहीं लगता और दूसरा इस काम के पैसे नहीं मिलते
Ashu Mishra
13 likes
जो पर्दादारी चली तो यारी नहीं चलेगी हमारी दुनिया में दुनियादारी नहीं चलेगी तुम्हारे जाने पे दिल का दफ़्तर समेट लेंगे फिर इस सड़क पर कोई सवारी नहीं चलेगी परिंदे भी बे-घरी से पहले ये सोचते थे कि सब्ज़ पेड़ों पे कोई आरी नहीं चलेगी हम अपनी मर्ज़ी से उस के दिल में रहा करेंगे हमारे घर में भी क्या हमारी नहीं चलेगी तुम्हारी चीखों से वो दरीचा नहीं खुलेगा बड़ी दुकानों पे रेज़गारी नहीं चलेगी हुज़ूर-ए-वाला ये आशू मिश्रा का दिल है इसपर हसीन चेहरों की होशियारी नहीं चलेगी
Ashu Mishra
15 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ashu Mishra.
Similar Moods
More moods that pair well with Ashu Mishra's ghazal.







