ghazalKuch Alfaaz

वो चुप हो गए मुझ से क्या कहते कहते कि दिल रह गया मुद्दआ' कहते कहते मिरा इश्क़ भी ख़ुद-ग़रज़ हो चला है तिरे हुस्न को बे-वफ़ा कहते कहते शब-ए-ग़म किस आराम से सो गए हैं फ़साना तिरी याद का कहते कहते ये क्या पड़ गई ख़ू-ए-दुश्नाम तुम को मुझे ना-सज़ा बरमला कहते कहते ख़बर उन को अब तक नहीं मर मिटे हम दिल-ए-ज़ार का माजरा कहते कहते अजब क्या जो है बद-गुमाँ सब से वाइज़ बुरा सुनते सुनते बुरा कहते कहते वो आए मगर आए किस वक़्त 'हसरत' कि हम चल बसे मरहबा कहते कहते

Related Ghazal

सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?

Zubair Ali Tabish

140 likes

यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

526 likes

उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

465 likes

चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

406 likes

क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

371 likes

More from Hasrat Mohani

और भी हो गए बेगाना वो ग़फ़लत कर के आज़माया जो उन्हें ज़ब्त-ए-मोहब्बत कर के दिल ने छोड़ा है न छोड़े तिरे मिलने का ख़याल बार-हा देख लिया हम ने मलामत कर के देखने आए थे वो अपनी मोहब्बत का असर कहने को ये है कि आए हैं अयादत कर के पस्ती-ए-हौसला-ए-शौक़ की अब है ये सलाह बैठ रहिए ग़म-ए-हिज्राँ पे क़नाअ'त कर के दिल ने पाया है मोहब्बत का ये आली रुत्बा आप के दर्द-ए-दवाकार की ख़िदमत कर के रूह ने पाई है तकलीफ़-ए-जुदाई से नजात आप की याद को सरमाया-ए-राहत कर के छेड़ से अब वो ये कहते हैं कि संभलों 'हसरत' सब्र ओ ताब-ए-दिल-ए-बीमार को ग़ारत कर के

Hasrat Mohani

0 likes

क्या वो अब नादिम हैं अपने जौर की रूदाद से लाए हैं मेरठ जो आख़िर मुझ को फ़ैज़ाबाद से सैर-ए-गुल को आई थी जिस दम सवारी आप की फूल उट्ठा था चमन फ़ख़्र-ए-मुबारकबाद से हर कस-ओ-ना-कस हो क्यूँँकर कामगार-ए-बे-ख़ुदी ये हुनर सीखा है दिल ने इक बड़े उस्ताद से इक जहाँ मस्त-ए-मोहब्बत है कि हर सू ब-ए-उन्स छाई है उन गेसुओं की निकहत-ए-बर्बाद से अब तलक मौजूद है कुछ कुछ लगा लाए थे हम वो जो इक लपका कभी न ख़ाक-ए-जहाँ आबाद से दावा-ए-तक़्वा का 'हसरत' किस को आता है यक़ीं आप और जाते रहें पीर-ए-मुग़ाँ की याद से

Hasrat Mohani

2 likes

आसान-ए-हक़ीकी है न कुछ सहल-ए-मजाज़ी मालूम हुई राह-ए-मोहब्बत की दराज़ी कुछ लुत्फ़ ओ नज़र लाज़िम ओ मलज़ूम नहीं हैं इक ये भी तमन्ना की न हो शोबदा बाज़ी दिल ख़ूब समझता है तिरे हर्फ़-ए-करम को हर-चंद वो उर्दू है न तुर्की है न ताज़ी क़ाएम है न वो हुस्न-ए-रुख़-ए-यार का आलम बाक़ी है न वो शौक़ की हंगामा-नवाज़ी ऐ इश्क़ तिरी फ़तह बहर-हाल है साबित मर कर भी शहीदान-ए-मोहब्बत हुए ग़ाज़ी कर जल्द हमें ख़त्म कहीं ऐ ग़म-ए-जानाँ काम आएगी किस रोज़ तिरी सीना-गुदाज़ी मालूम है दुनिया को ये 'हसरत' की हक़ीक़त ख़ल्वत में वो मय-ख़्वार है जल्वत में नमाज़ी

Hasrat Mohani

0 likes

हर हाल में रहा जो तिरा आसरा मुझे मायूस कर सका न हुजूम-ए-बला मुझे हर नग़्में ने उन्हीं की तलब का दिया पयाम हर साज़ ने उन्हीं की सुनाई सदा मुझे हर बात में उन्हीं की ख़ुशी का रहा ख़याल हर काम से ग़रज़ है उन्हीं की रज़ा मुझे रहता हूँ ग़र्क़ उन के तसव्वुर में रोज़ ओ शब मस्ती का पड़ गया है कुछ ऐसा मज़ा मुझे रखिए न मुझ पे तर्क-ए-मोहब्बत की तोहमतें जिस का ख़याल तक भी नहीं है रवा मुझे क्या कहते हो कि और लगा लो किसी से दिल तुम सा नज़र भी आए कोई दूसरा मुझे बेगाना-ए-अदब किए देती है क्या करूँं उस महव-ए-नाज़ की निगह-ए-आशना मुझे उस बे-निशां के मिलने की 'हसरत' हुई उम्मीद आब-ए-बक़ा से बढ़ के है ज़हर-ए-फ़ना मुझे

Hasrat Mohani

0 likes

है मश्क़-ए-सुख़न जारी चक्की की मशक़्क़त भी इक तुर्फ़ा तमाशा है 'हसरत' की तबीअत भी जो चाहो सज़ा दे लो तुम और भी खुल खेलो पर हम से क़सम ले लो की हो जो शिकायत भी दुश्वार है रिंदों पर इंकार-ए-करम यकसर ऐ साक़ी-ए-जाँ-परवर कुछ लुत्फ़-ओ-इनायत भी दिल बस-कि है दीवाना उस हुस्न-ए-गुलाबी का रंगीं है उसी रू से शायद ग़म-ए-फ़ुर्क़त भी ख़ुद इश्क़ की गुस्ताख़ी सब तुझ को सिखा देगी ऐ हुस्न-ए-हया-परवर शोख़ी भी शरारत भी बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी बादल जो नज़र आए बदली मेरी निय्यत भी उश्शाक़ के दिल नाज़ुक उस शोख़ की ख़ू नाज़ुक नाज़ुक इसी निस्बत से है कार-ए-मोहब्बत भी रखते हैं मिरे दिल पर क्यूँँ तोहमत-ए-बेताबी याँ नाला-ए-मुज़्तर की जब मुझ में हो क़ुव्वत भी ऐ शौक़ की बेबाकी वो क्या तेरी ख़्वाहिश थी जिस पर उन्हें ग़ुस्सा है इनकार भी हैरत भी हर-चंद है दिल शैदा हुर्रियत-ए-कामिल का मंज़ूर-ए-दुआ लेकिन है क़ैद-ए-मोहब्बत भी हैं 'शाद' ओ 'सफ़ी' शाइ'र या 'शौक़' ओ 'वफ़ा' 'हसरत' फिर 'ज़ामिन' ओ 'महशर' हैं 'इक़बाल' भी 'वहशत' भी

Hasrat Mohani

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Hasrat Mohani.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Hasrat Mohani's ghazal.