ghazalKuch Alfaaz

वहाँ कैसे कोई दिया जले जहाँ दूर तक ये हवा न हो उन्हें हाल-ए-दिल न सुनाइए जिन्हें दर्द-ए-दिल का पता न हो हों अजब तरह की शिकायतें हों अजब तरह की इनायतें तुझे मुझ से शिकवे हज़ार हों मुझे तुझ से कोई गिला न हो कोई ऐसा शे'र भी दे ख़ुदा जो तिरी अता हो तिरी अता कभी जैसा मैं ने कहा न हो कभी जैसा मैं ने सुना न हो न दिए का है न हवा का है यहाँ जो भी कुछ है ख़ुदा का है यहाँ ऐसा कोई दिया नहीं जो जला हो और वो बुझा न हो मैं मरीज़-ए-इश्क़ हूँ चारा-गर तू है दर्द-ए-इश्क़ से बे-ख़बर ये तड़प ही उस का इलाज है ये तड़प न हो तो शिफ़ा न हो

Related Ghazal

वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

244 likes

पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं

Ali Zaryoun

158 likes

कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

435 likes

उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

107 likes

मुझे उदास कर गए हो ख़ुश रहो मिरे मिज़ाज पर गए हो ख़ुश रहो मिरे लिए न रुक सके तो क्या हुआ जहाँ कहीं ठहर गए हो ख़ुश रहो ख़ुशी हुई है आज तुम को देख कर बहुत निखर सँवर गए हो ख़ुश रहो उदास हो किसी की बे-वफ़ाई पर वफ़ा कहीं तो कर गए हो ख़ुश रहो गली में और लोग भी थे आश्ना हमें सलाम कर गए हो ख़ुश रहो तुम्हें तो मेरी दोस्ती पे नाज़ था इसी से अब मुकर गए हो ख़ुश रहो किसी की ज़िन्दगी बनो कि बंदगी मिरे लिए तो मर गए हो ख़ुश रहो

Fazil Jamili

73 likes

More from Nawaz Deobandi

ले के माज़ी को जो हाल आया तो दिल काँप गया जब कभी उन का ख़याल आया तो दिल काँप गया ऐसा तोड़ा था मुहब्बत में किसी ने दिल को जब किसी शीशे में बाल आया तो दिल काँप गया सर बुलंदी पे तो मग़रूर थे हम भी लेकिन चढ़ते सूरज पे ज़वाल आया तो दिल काँप गया बद-नज़र उठने ही वाली थी किसी की जानिब अपने बेटी का ख़याल आया तो दिल काँप गया

Nawaz Deobandi

7 likes

ख़ुद को कितना छोटा करना पड़ता है बेटे से समझौता करना पड़ता है जब औलादें नालायक़ हो जाती हैं अपने ऊपर ग़ुस्सा करना पड़ता है सच्चाई को अपनाना आसान नहीं दुनिया भर से झगड़ा करना पड़ता है जब सारे के सारे ही बे-पर्दा हों ऐसे में खु़द पर्दा करना पड़ता है प्यासों की बस्ती में शो'ले भड़का कर फिर पानी को महंगा करना पड़ता है हँस कर अपने चहरे की हर सिलवट पर शीशे को शर्मिंदा करना पड़ता है

Nawaz Deobandi

2 likes

मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते दो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते इक हम हैं कि ग़ैरों को भी कह देते हैं अपना इक तुम हो कि अपनों को भी अपना नहीं कहते कम-हिम्मती ख़तरा है समुंदर के सफ़र में तूफ़ान को हम दोस्तो ख़तरा नहीं कहते बन जाए अगर बात तो सब कहते हैं क्या क्या और बात बिगड़ जाए तो क्या क्या नहीं कहते

Nawaz Deobandi

33 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Nawaz Deobandi.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Nawaz Deobandi's ghazal.