आ गई याद शाम ढलते ही बुझ गया दिल चराग़ जलते ही
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हम भी 'मुनीर' अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं
Muneer Niyazi
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मकाँ है क़ब्र जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं मैं अपने घर में हूँ या मैं किसी मज़ार में हूँ
Muneer Niyazi
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ख़्वाब होते हैं देखने के लिए उन में जा कर मगर रहा न करो
Muneer Niyazi
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शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं
Muneer Niyazi
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महक उठे रंग-ए-सुर्ख़ जैसे खिले चमन में गुलाब इतने
Muneer Niyazi
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