आदमी नहीं मशीन होना है मुझे तो अब मुझ को लगता है कि सुख तो बस यही हुनर में है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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तश्त-अज़-बाम तो आज भी हूँ हाँ मैं बदनाम तो आज भी हूँ कुछ हो कोशिश मैं करता रहूँगा वरना नाकाम तो आज भी हूँ
Jagat Singh
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जो ग़म लिखा है पहले सहा है उसे मैं ने मेरी लिखी ग़ज़लें ज़रा भी आम नहीं हैं
Jagat Singh
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देखो ये आसमाँ आज कुछ ज़्यादा ही सूना है सिर्फ़ तारों से कितनी ही फिर रौशनी होती है
Jagat Singh
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ये राज़ की थी बात पर अब कहता हूँ तुम से बिछड़ कर रोया मैं भी था बहुत
Jagat Singh
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यक़ीनन ये मुहब्बत नाम की होगी जो तू रहता है अब भी होश में अपने
Jagat Singh
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