तश्त-अज़-बाम तो आज भी हूँ हाँ मैं बदनाम तो आज भी हूँ कुछ हो कोशिश मैं करता रहूँगा वरना नाकाम तो आज भी हूँ
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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महीना जनवरी का सर्द तर मुझ को दिलाता याद उस की है जो इस मौसम में बाहर निकले तो हल्की गुलाबी सी हो जाती है
Jagat Singh
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तुम्हारा मेरी नाकामी से वाक़िफ़ होना बेहद ही ज़रूरी है तुम्हारा क़ामयाबी पर मेरी हैरान होने के लिए जानाँ
Jagat Singh
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वहीं पर मैं मरूँगा जिस जगह गाहे किसी को देख कर मुँह फेरा हो तू ने
Jagat Singh
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सो दफ़ा उस का नज़र-अंदाज़ करना बे-असर था एक हिचकी ने जगा रक्खी थी दिल में इतनी उम्मीद
Jagat Singh
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ये राज़ की थी बात पर अब कहता हूँ तुम से बिछड़ कर रोया मैं भी था बहुत
Jagat Singh
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