महीना जनवरी का सर्द तर मुझ को दिलाता याद उस की है जो इस मौसम में बाहर निकले तो हल्की गुलाबी सी हो जाती है
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारा मेरी नाकामी से वाक़िफ़ होना बेहद ही ज़रूरी है तुम्हारा क़ामयाबी पर मेरी हैरान होने के लिए जानाँ
Jagat Singh
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सो दफ़ा उस का नज़र-अंदाज़ करना बे-असर था एक हिचकी ने जगा रक्खी थी दिल में इतनी उम्मीद
Jagat Singh
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नहीं है कोई तेरे लौट के आने का अब आसार न जाने फिर भी क्यूँ मैं रोज़ तेरी राह तकता हूँ
Jagat Singh
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नज़र आना तेरा चेहरा मेरे जीने का साधन है तुझे बस मुड़ के तकना है मुझे साँसें चलानी हैं
Jagat Singh
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नहीं मनाया जाएगा वो नख़रे बाज़ अब मुझ सेे मैं मर भी गर गया ना तो वो भी ज़िया जाएगा
Jagat Singh
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