आदमी सादा बहुत हूँ आज तक यूँँ मैं नहीं इक लफ़्ज़ ज़्यादा बोलता हूँ
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी की तलाश करता हूँ रोज़ हो कर हताश मरता हूँ
Vinod Ganeshpure
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ज़िंदगी तू एक जन्नत आज होती मैं तिरा जो इश्क़ होता काश पहला
Vinod Ganeshpure
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पद से बड़े भी लोग वो होंगे मगर दिल के बड़े ही हो ज़रूरी तो नहीं
Vinod Ganeshpure
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ज़िंदगी में बस तरक़्क़ी है ज़रूरी लोग वरना भाव देते ही नहीं हैं
Vinod Ganeshpure
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ज़िंदगी मेरी नहीं है जानता हूँ ज़िंदगी की चाल मैं पहचानता हूँ
Vinod Ganeshpure
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