आग घर में लग रखी है लोग मरते जा रहें हैं इस हुकूमत को नहीं फ़ुर्सत किसी के वास्ते भी
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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ये मुहब्बत के मरे मारे हुए लोग इन से ही सीखा है रोना इस जहाँ में
Brajnabh Pandey
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मेरे दिल मान जा तू मुझ सेे यूँँ रूठा न कर हर बार वो जो तुझ को मनाता था वो कब का जा चुका है यार
Brajnabh Pandey
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मुहब्बत उस को पल-भर तो हुई होगी यूँँ कोई शख़्स तो पागल नहीं होता
Brajnabh Pandey
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मेरे सारे उदासी के धन का मेरे बेटे तू त्याग कर देना
Brajnabh Pandey
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नाज़ तू ने सब उठाए मेरे ख़ातिर काश करता कुछ मैं भी जाँ तेरे ख़ातिर उम्र भर मरता रहा इक बूँद पर मैं और समुंदर भी था प्यासा मेरे ख़ातिर
Brajnabh Pandey
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