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आगे कभी हो जाए तो मैं नहीं कह सकता अब तक तो मोहब्बत के आसार नहीं दिखते

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जो भी शामिल होगा लश्कर में तुम्हारे डूब भी सकता है सागर में तुम्हारे पड़ गई ठंडक कलेजे को बताओ हो गए बर्बाद चक्कर में तुम्हारे

Raj Sengar

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हम को ये दोस्ती भी महँगी पड़ी चारा-गर जब से देखा तुझे बीमार रहा करते हैं

Raj Sengar

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समर्पित कर रहा हूँ मैं तुम्हें कुछ गीत ग़ज़लें अब बड़े ही प्यार से सुनना मेरे प्रिय मीत ग़ज़लें अब

Raj Sengar

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आप अगर शहर से कूच करने को तैयार हैं फिर तो हम लोग भी आज मरने को तैयार हैं हम तो सदियों से ख़ाली पड़े हैं यहाँ दुनिया में प्यार बरसाओ तुम हम तो भरने को तैयार हैं

Raj Sengar

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दर्द था और शा'इरी थी और क्या था तेरी मुझ सेे दोस्ती थी और क्या था आते जाते बस मुझे इतना दिखा था उस के कमरे में घड़ी थी और क्या था

Raj Sengar

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