आह यूँँ टूटा भरम, सब कुछ ख़तम उन्स, कीना, साद, ग़म, सब कुछ ख़तम
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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रोज़ खोता हूँ ख़यालों में तुम्हारी जानाँ रोज़ धुँधली हुई तस्वीर उभर आती है
Ashraf Ali
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पुतलियों में घुला समुंदर है मोतियों की दुकान आँखें हैं आप तहक़ीक़ ही नहीं करते सब ख़ज़ानों की खान आँखें हैं
Ashraf Ali
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कोई तो सदमा लगा है ज़रूर मुझ को भी थकन शदीद है और नींद भी उड़ी हुई है नजूमी तकते हैं बेचारगी से मेरी तरफ़ लकीर माथे पे जितनी भी थी मिटी हुई है
Ashraf Ali
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किसी ने मुफ़्त में पाया है उस को जो हर क़ीमत पे मुझ को चाहिए था
Ashraf Ali
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जो भी मुझ में बाक़ी है गड़बड़ी निकालूँगा चाबियाँ बनाऊँगा, हथकड़ी निकालूँगा ये जो तुम शरीफ़ों को धौंस देते फिरते हो एक दिन तुम्हारी भी हेकड़ी निकालूँगा
Ashraf Ali
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