आज भी रोका गया है बोलने से हाल दिल का फिर छुपाना है बलम से
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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नहीं होते मुफ़्लिस सुख़न-वर सभी कई साल दिल्ली 'ज़फ़र' की रही
Saurabh
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जिन का भी पहनावा सादा होगा उन्हें बदन का इल्म ज़ियादा होगा
Saurabh
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शे'र पहले तो गुज़रते हैं अलम से बा'द उस के कुछ हुआ मेरी क़लम से
Saurabh
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उम्र भर हम को यही इक काम दे दो देखने को रोज़ ढलती शाम दे दो
Saurabh
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राय हम यही देंगे आप को मुहब्बत में ख़ानदान से पहले देख ख़ानदानी को
Saurabh
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