आज एक दूजे को छोड़ जाना है हम ने आओ आख़िरी बारी शहर साथ में देखें Behr: 212 1222 212 1222
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है
Waseem Barelvi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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वो पहाड़ों से यूँँ नीचे देखता है जैसे अब भी बाबा नीचे बैठे होंगे
Amanpreet singh
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वही फिर बात होने से ख़फ़ा हो तुम वहीं फिर बात करने की मुआ'फ़ी है
Amanpreet singh
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मुझे नाराज़ होने का यूँँ हक़ तो अब नहीं शायद उसे मुझ सेे कहीं प्यारी अना अपनी ही है यारों
Amanpreet singh
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उसे तर्क-ए-मोहब्बत से नहीं कोई परेशानी इसी इक बात ने दिल में परेशानी बढ़ाई है
Amanpreet singh
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तुझे तेरी मोहब्बत की क़सम है अब मिटाना है गुमाँ सब इश्क़ को ले कर
Amanpreet singh
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