आज इक बहती नदी को मोड़ कर के देखा है वक़्त के इस बाँध को अब तोड़ कर के देखा है जब लिखा था वो लगा था सिर्फ़ राधा कृष्ण सा बस हमारा नाम मैं ने जोड़ कर के देखा है
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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ये फ़ोकस पढ़ाई फ़्यूचर लगन और करियर की बातें मियाँ मसअला ये है तुम ने अभी उस को देखा नहीं है
Ahmad Farhad
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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ये किस ने बाग़ से उस शख़्स को बुला लिया है परिंद उड़ गए पेड़ों ने मुँह बना लिया है उसे पता था मैं छूने में वक़्त लेता हूँ सो उस ने वस्ल का दौरानिया बढ़ा लिया है
Tehzeeb Hafi
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
Meer Taqi Meer
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चले जो साथ ऑटो में वो गाड़ी में चलेगी फिर कभी जो सूट में थी साथ साड़ी में चलेगी फिर
Divya 'Kumar Sahab'
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ध्यान रखना चुप न हो जाए कहीं वो हक़ जता कर जो तुझे समझा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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सिर्फ़ साँसे ही नहीं ये नाम तेरा ही चले ख़ून में साँसे नहीं अब, घोलते हम हैं तुझे
Divya 'Kumar Sahab'
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हाँ आप बच्चे की तरह मुझ को मना लेंगे अगर फिर आप सबके सामने भी डाँट मुझ को लीजिये
Divya 'Kumar Sahab'
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जितना ख़ुश रहते हैं हम उतना है जीवन सारा जीवन भी इक लम्हा हो सकता है
Divya 'Kumar Sahab'
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