आज जवानी ठोकर खाकर गिरती है बूढ़े कंधे बोझ उठाए चलते हैं
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हो गया ग्यारह का तो दिखने लगीं मजबूरियाँ बीस का होते ही अपनी नौजवानी छोड़ दी
nakul kumar
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रात भी नींद भी कहानी भी हाए क्या चीज़ है जवानी भी
Firaq Gorakhpuri
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मुझे आँखें दिखा कर बोलती है चुप रहो भैया बहिन छोटी भले हो बात वो अम्मा सी करती है
Divy Kamaldhwaj
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याद आओ मुझे लिल्लाह न तुम याद करो मेरी और अपनी जवानी को न बर्बाद करो
Akhtar Shirani
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ये बात अभी सब को समझ आई नहीं है दीवाना है दीवाना तमन्नाई नहीं है दिल मेरा दुखाकर ये मुझे तेरा मनाना मरहम है फ़क़त ज़ख़्म की भरपाई नहीं है
Vikram Gaur Vairagi
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ख़ामोशियाँ ग़ुलाम बनाती हैं शोर को शब इश्क़ के उसूल सिखाती चकोर को दिन भर तो मेरे यार मेरे यार थे बहुत पर शाम को गया जो वो लौटा न भोर को
Anmol Mishra
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ये हुनर मेरे भी अंदर आ गया है दोस्तों दिल पे लगती बात को बस मुस्कुरा कर टाल दूँ
Anmol Mishra
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क़ीमती स्याही भरी जिस जिस क़लम में आँसुओं की वक़्त पे वो भूल बैठे ये ग़लत ये ठीक सा है बोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरी एक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है
Anmol Mishra
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महकते पन्नों की भीनी ख़ुशबू नशा चढ़ाए अलग तरह का जहाँँ में जितने शराब-ख़ाने बनाओ सारे किताबख़ाने
Anmol Mishra
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तमाम रातें सुकून सारा चुरा के जानाँ कहाँँ को चल दी सुनो शब-ए-वस्ल है हमारी जगा के जानाँ कहाँँ को चल दी हमारे पैरों पे पैर रख के खड़ी हुई थी गले लगाने तुम्हारे पैरों लगी महावर लगा के जानाँ कहाँँ को चल दी
Anmol Mishra
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