आज का कान बख़्त खींचेगा यादें ख़ामोश होती जाएँगी
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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं
Rehman Faris
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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आप की आँखें अगर शे'र सुनाने लग जाएँ हम जो ग़ज़लें लिए फिरते हैं, ठिकाने लग जाएँ
Rehman Faris
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
Rahat Indori
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ये भी तो काफ़ी है कि जाते वक़्त तुम इक बार ठहरे थे जहाँ हम ठहरे हैं
Chetan
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ज़िंदगी धूप में गुज़ारेंगे देख साए का क्या से क्या होगा
Chetan
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यूँँ चमकता हूँ मैं खंडर तुझ सेे तू मुझे मेरा चाँद लगता है
Chetan
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तेरे बिन हम कहाँ हुए पागल हम समझदार क्यूँ कहें ख़ुद को
Chetan
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साँसें बढ़ती थी पास आते ही तेरी फ़ुर्क़त में मरना वाजिब है
Chetan
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