आज मेरी इक ग़ज़ल ने उस के होंटों को छुआ आज पहली बार अपनी शाइ'री अच्छी लगी
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वगैरा करती है बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है रोने में आसानी पैदा करती है
Tehzeeb Hafi
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साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
Bashir Badr
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बिछड़ जाएँगे हम दोनों ज़मीं पर ये उस ने आसमाँ पर लिख दिया है
Siraj Faisal Khan
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वो कभी आग़ाज़ कर सकते नहीं ख़ौफ़ लगता है जिन्हें अंजाम से
Siraj Faisal Khan
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उस के दिल की आग ठंडी पड़ गई मुझ को शोहरत मिल गई इल्ज़ाम से
Siraj Faisal Khan
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ख़ौफ़ आता है अपने साए से हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं
Siraj Faisal Khan
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इश्क़ मेरी ज़बान से निकला और मैं ख़ानदान से निकला
Siraj Faisal Khan
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