aaj phir nind ko aankhon se bichhadte dekha aaj phir yaad koi chot purani aai
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा
Fahmi Badayuni
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
Iqbal Ashhar
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हमें भी वक़्त ने पत्थर सिफ़त बना डाला हमीं थे मोम की सूरत पिघलने वाले लोग सितम तो ये कि हमारी सफ़ों में शामिल हैं चराग़ बुझते ही ख़ेमा बदलने वाले लोग
Iqbal Ashhar
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वो किसी को याद कर के मुस्कुराया था उधर और मैं नादान ये समझा कि वो मेरा हुआ
Iqbal Ashhar
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वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़ेहन में न मैं कह सका न मैं लिख सका कि ज़बाँ मिली तो कटी हुई जो क़लम मिला तो बिका हुआ
Iqbal Ashhar
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मुद्दतों ब'अद मुयस्सर हुआ माँ का आँचल मुद्दतों ब'अद हमें नींद सुहानी आई
Iqbal Ashhar
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