आख़िरी बस है और निकलने वाली है आ जाओ इक सीट बराबर ख़ाली है
sherKuch Alfaaz
Shaukat Fehmi24 Likes
Related Sher
हम ने पर्चे आँसुओं से भर दिए और तुम ने इतने कम नंबर दिए ऊंचे नीचे घर थे बस्ती में बहुत जलजले ने सब बराबर कर दिए
Zubair Ali Tabish
90 likes
रख के हर चीज़ भूलने वाली ला तेरा दिल सँभाल कर रख दूँ
Kumar Vishwas
99 likes
छोटी छोटी बातें कर के, बड़े कहाँ हो जाओगे पतली गलियों से निकलो तो खुली सड़क पर आओगे
Waseem Barelvi
55 likes
मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर ख़ाली है बाबूजी मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी मिट्टी बेच रहा हूँ जिस में कोई जाल फ़रेब नहीं सोना चाँदी दूध मिठाई सब जा'ली है बाबूजी
Gyan Prakash Akul
61 likes
वा'दा करो कि हाथ छुड़ा कर न जाओगे वा'दा करो कि सात जनम तक रहेगा इश्क़
Mukesh Jha
43 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shaukat Fehmi.
Similar Moods
More moods that pair well with Shaukat Fehmi's sher.







