बदला जो वक़्त गहरी रफ़ाक़त बदल गई सूरज ढला तो साए की सूरत बदल गई इक उम्र तक मैं उस की ज़रूरत बना रहा फिर यूँँ हुआ कि उस की ज़रूरत बदल गई
sherKuch Alfaaz
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का
Shahryar
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वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी
Nadir Ariz
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सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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कोई अटका हुआ है पल शायद वक़्त में पड़ गया है बल शायद दिल अगर है तो दर्द भी होगा इस का कोई नहीं है हल शायद
Gulzar
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