वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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भेज देता हूँ मगर पहले बता दूँ तुझ को मुझ से मिलता नहीं कोई मिरी तस्वीर के बा'द
Umair Najmi
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अब उस सेे दोस्ती है जिस सेे कल मुहब्बत थी अब इस सेे ज़्यादा बुरा वक़्त कुछ नहीं है दोस्त
Vishal Singh Tabish
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मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता
Naseer Turabi
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रह भी सकता है कहीं नाम तेरा लिक्खा हुआ सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते
Nadir Ariz
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सारे ग़म भूल गए आप के रोने पे मुझे किस को ठंडक में पसीने का ख़याल आता है आखरी उम्र में जाते है मदीने हम लोग मरने लगते है तो जीने का ख़याल आता है
Nadir Ariz
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वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी रास्ता ख़त्म मकानों के तजावुज़ से हुआ मैं ने जब नक़्शा बनाया था गली रक्खी थी
Nadir Ariz
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इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
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अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते उस का नंबर है मगर कॉल नहीं कर सकते
Nadir Ariz
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