वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी रास्ता ख़त्म मकानों के तजावुज़ से हुआ मैं ने जब नक़्शा बनाया था गली रक्खी थी
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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भेज देता हूँ मगर पहले बता दूँ तुझ को मुझ से मिलता नहीं कोई मिरी तस्वीर के बा'द
Umair Najmi
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रह भी सकता है कहीं नाम तेरा लिक्खा हुआ सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते
Nadir Ariz
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सारे ग़म भूल गए आप के रोने पे मुझे किस को ठंडक में पसीने का ख़याल आता है आखरी उम्र में जाते है मदीने हम लोग मरने लगते है तो जीने का ख़याल आता है
Nadir Ariz
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वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी
Nadir Ariz
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अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते उस का नंबर है मगर कॉल नहीं कर सकते
Nadir Ariz
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ए'तिबार आता नहीं तो आज़मा के देख ले हम तेरे सब चाहने वालों में अव्वल आएँगे
Nadir Ariz
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